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मप्र में टेस्टिंग में पास हुआ खतरनाक बम, अब वायुसेना के लिए बनेगा

जबलपुर. वायुसेना के लिए ग्रे-आयरन फाउंड्री (जीआईएफ) में जल्द ही 250 किग्रा शक्तिशाली बम का उत्पादन शुरू होगा। इस बम की ढलाई पहले हो चुकी थी, एक जरूरी टेस्ट में भी वह पास हो गया है। अब नियमित ढलाई का काम शुरू होगा और बड़ी बात यह है कि इस बम का हीट ट्रीटमेंट भी फाउंड्री में होगा। मशीनिंग के लिए भी इंतजाम यहीं पर किए जा रहे है इसस दूसरे शहरों में इस बम को भेजने में लगने वाला समय बचेगा।
जीआइएफ- हीट ट्रीटमेंट व मशीनिंग की सुविधा भी यहीं होगी
जीआईएफ में मुख्य रूप से 120 किलो एरियल बम और हैंड ग्रेनेड की बॉडी की ढलाई होती है। इस समय एरियल बम का काम बंद है। आयुध निर्माण बोर्ड से इसका ऑर्डर नहीं मिला केवल हैंड ग्रेनेड की ढलाई हो रही है इसके अलावा माइन प्रोटेक्टिड वीकल (एमपीवी) और अब शारंग तोप का काम शुरू हुआ लेकिन 250 किग्रा विध्वंसक बम की बॉडी के उत्पादन से वर्कलोड की समस्या दूर हो जाएगी। लगभग 300 बमों का हर साल उत्पादन का ऑर्डर जीआईएफ को मिल सकता है।
पहले गरम फिर ठंडा किया जाएगा बम
इस बम की ढलाई के अलावा बम के हीट ट्रीटमेंट मशीन के लिए टेंडर हो चुके है, जानकारों ने बताया कि इस प्रक्रिया के तहत बम बॉडी को पहले उच्च तापमान पर गरम किया जाता है फिर माइनस डिग्री पर ठंडा किया जाता है। यह परीक्षण इसलिए जरूरी होता है क्योंकि फाइटर प्लेन से इसे जमीन पर छोडा जाता है तो लॉन्चर से काफी गर्माहट पैदा होती है। हर मौसम में यह काम करे इस स्थिति में भी यह प्रक्रिया कारगर होती है।

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