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चौकीदार को दो बार बुजुर्ग मान विभाग ने किया सेवानिवृत्त, हाईकोर्ट ने मानी उम्र 59 साल, अब 2029 होंगे सेवानिवृत्त

ग्वालियर. मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने वन विभाग के एक बेहद चौंकाने वाले और तानाशाही फैसले पर रोक लगाते हुए शुक्रवार को एक दैनिक वेतन भोगी चौकीदार के अधिकार में बड़ा फैसला सुनाया है।जिला मेडीकल बोर्ड की वैज्ञानिक रिपोर्ट को कूड़ेदान में फेंकर कर्मचारी का अधिकारियों ने मनमाने ढंग से जबरन सेवानिवृत्त करने के विभाग के 2 अलग-अलग आदेश दिये थे। मतलब कागजों में 2 बार रिटायर्ड किया है। इन आदेशों को हाईकोर्ट में पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने वन विभाग को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिये हैं कि याचिकाकर्ता कर्मचारी को अप्रैल 2029 में उसकी कानूनी सेवाकाल की आयु 62 वर्ष पूरी होने तक सम्मान समेत नौकरी पर बनाये रखा जाये। हाईकोर्ट ने वर्ष 2017 में मेडीकल बोर्ड की रिपोर्ट जिसमें उस वक्त उसकी उम्र 50 वर्ष मानकर ही फैसला लिया है।
वर्ष 2029 में रिटायर होगा चौकीदार
हाईकोर्ट ने साहब सिंह ठाकुर की याचिका को पूरी तरह स्वीकार करते हुए वन विभाग के काले आदेशों को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि साहब सिंह अप्रैल 2029 तक सम्मानूपूर्वक अपनी ड्यूटी करेंगे। इसके साथ ही विभाग की इस मनमानी की वजह से पूर्व में उन्हें जो भी आर्थिक या मानसिक नुकसान हुआ है। उन्हें नियमित वेतन समेत सभी तरह के बैक वेजेस (बैक-वेजेस) सेवालाभ और एरियर का भुगतान तत्काल किया जाये।
साल 2018 में दूसरी बार रिटायरमेंट कर दिया
हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर से बौखलाए विभाग ने कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए 17 अप्रैल 2018 को एक और नया आदेश जारी कर दिया।
अफसरों ने गलती छुपाने के लिए साहब सिंह की उम्र 62 वर्ष घोषित कर उन्हें फिर से नौकरी से बाहर धकेलने का प्रयास किया।
दस्तावेजों पर एक ही कर्मचारी को दो बार जबरन बूढ़ा बना दिया गया।
पूरा मामला
साहब सिंह ठाकुर को 12 अगस्त 1986 को दतिया वन परिक्षेत्र में दैनिक वेतन भोगी चौकीदार के पद पर नियुक्त किया था।
साहब सिंह ने करीब 31 साल नौकरी में लगा दिए। 25 अप्रैल 2017 को विभाग ने उनकी सेवाओं को नियमित (स्थायी) कर दिया।
साहब सिंह की भर्ती के समय वन विभाग के पास उनकी आयु का कोई आधिकारिक या पुख्ता रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।
तत्कालीन संभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) ने नियमानुसार उनका ‘एज डिटरमिनेशन टेस्ट’ (आयु परीक्षण) कराने के लिए उन्हें जिला मेडिकल बोर्ड भेजा।
7 अप्रैल 2017 को डॉक्टरों के विशेषज्ञ पैनल (मेडिकल बोर्ड) ने पूरी वैज्ञानिक जांच के बाद साहब सिंह की वास्तविक उम्र 50 वर्ष निर्धारित की थी।
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक साहब सिंह ठाकुर को साल 2029 में रिटायर होना था।
विभाग ने साहब सिंह की उम्र सीधे 60 वर्ष मान ली और 2017 में ही उनकी सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) का आदेश थमा दिया।
पीड़ित कर्मचारी जब हाईकोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने इस आदेश पर तुरंत ‘स्टे’ (स्थगन) दे दिया।

 

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