रेत से भरी नाव जला देना किस नियम के तहत, लेडी इंस्पेक्टर पर साक्ष्य मिटाने का आरोप

मुरैना. सबलगढ़ में अवैध रेत खनन के खिलाफ कार्यवाही के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गयी। सबलगढ़ थाना टीआई राजकुमारी परमार और उनकी टीम चम्बल के कलर घाटी पर अवैध रेत परिवहन के खिलाफ कार्यवाही करने पहुंची थी। इस बीच पुलिस ने रेत से भरी एक नाव को पकड़ा, लेकिन इसके बाद जो हुआ उसका वीडियो गुरूवार को सामने आया है।
ऐसा बताया जा रहा है कि पुलिस टीम ने नाव से रेत हटवाने के बाद मौके पर ही नाव में आग लगवा दी। वायरल वीडियो में टीआई राजकुमारी परमार जलती हुई नाव के पास बैठी दिखाई दे रही है। एक अन्य वीडियो में पुलिसकर्मी नाव से रेत हटाते हुए दिखाई दे रहे है। जबकि तीसरे वीडियो में र्टीआइ अपने स्टाफ को निर्देश देती सुनाई दे रही है। वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठ रहे है। अवैध रेत पर कार्यवाही करना सही है। लेकिन जब्त की जाने वाली नाव को आग लगा देना किस नियम के तहत किया गया है।
जलाना कानूनन गलत
माइंस एंड मिनरल्स डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन एक्ट 1957 के तहत अवैध रेत परिवहन में उपयोग किए गए वाहन या नाव को जब्त किया जाता है। ऐसे में नाव को जलाने की कार्रवाई गलत है।ग्वालियर हाईकोर्ट के अधिवक्ता प्रद्युम्न प्रताप सिंह परिहार का कहना है कि अगर नाव को आग लगाई गई है तो यह कानूनन गलत माना जा सकता है। उनके अनुसार पुलिस को नाव और रेत दोनों को जब्त करना चाहिए था। नाव नष्ट होने की स्थिति में रेत तस्करी से जुड़े साक्ष्य भी प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, सबलगढ़ एसडीओपी और प्रशिक्षु आईपीएस राजकृष्णा ने कहा कि वीडियो में टीआई आग लगाते हुए नजर नहीं आ रही हैं। उनके मुताबिक संभव है कि आरोपियों ने खुद नाव में आग लगाई हो। हालांकि पुलिस की मौजूदगी में आग कैसे लगी और उसे बुझाने का प्रयास क्यों नहीं किया गया, इसका जवाब थाना प्रभारी ही बेहतर तरीके से दे सकती हैं।

