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11 करोड़ रूपये खर्च के बाद स्मार्ट सिटी बस सेवा फेल, सुनसान इलाके में खड़ी बसें बनी कबाड़

सुनसान इलाके में रेलवे ओवर ब्रिज के नीचे खड़ी कबाड़ा हो रही स्मार्ट सिटी की बसें।

ग्वालियर. स्मार्ट सिटी का सपना अब सवालों में घिरता दिखाई दे रहा है। शहरवासियों को सस्ती और बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा देने के लिये शुरू की गयी स्मार्ट सिटी बस सेवा आज तरह से ठप्प हा गयी है।
ळालात यह है कि जिन बसों को शहर की लाइफलाइन बनना था वह अब सुनसान इलाकों में कबाड़ बनकर खड़ी-खड़ी जंग खा रही है। वर्ष 2023में ग्वालियर स्मार्ट सिटी डवलपमेंट कॉर्पोशन ने इंट्रा सिटी बस सेवा की शुरूआत की थी। आधुनिक सुविधाओं से लैस इन बसों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम भी लगाया गया था। ताकि यात्रियों को सुरक्षित और सुगम सफर का लाभ मिल सके। लेकिन शुरूआत के महिनों के बाद ही यह योजना पटरी से उतर गयी। इस योजना के लिए करीब 11 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया था। एक निजी कंपनी को 16 इंट्रा सिटी और कुल 32 बसें (इंटरसिटी सहित) चलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन जमीनी स्तर पर संचालन लगभग न के बराबर रहा।
सूत्रों के मुताबिक, शहर में पहले से चल रहे ऑटो और विक्रम का दबदबा इतना अधिक है कि निजी कंपनी ने बस संचालन में खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। धीरे-धीरे बसें सड़कों से गायब हो गईं और अब रेस कोर्स रोड, गार्डर वाली पुलिया व रेलवे ओवर ब्रिज के नीचे खड़ी नजर आ रही हैं। बसों में लगाए गए जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम का मकसद हर मूवमेंट पर नजर रखना था, लेकिन जब बसें ही नहीं चलीं, तो यह हाईटेक सिस्टम भी बेकार साबित हुआ। हजीरा निवासी मूलचंद का कहना है कि शहर में सरकारी बस सेवा पूरी तरह गायब है, जबकि करोड़ों की बसें कबाड़ में खड़ी हैं। उनका आरोप है कि यह जनता का पैसा है, जिसे सही तरीके से उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर हो रहे विकास कार्य सिर्फ दिखावा हैं।
सवालों के घेरे में स्मार्ट सिटी प्लान
करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी योजना टिकाऊ क्यों नहीं रही?
क्या बिना ग्राउंड सर्वे के प्रोजेक्ट शुरू किया गया?
जिम्मेदारों की जवाबदेही तय क्यों नहीं हुई?
जनता का आरोप: “विकास के नाम पर पैसा बर्बा

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