29 वर्षो पुराना जेसी मिल को जल्द आने वाला है फैसला, हजारों श्रमिकों की देनदारी पर टिकी नजरें, हाईकोर्ट में होगी निर्णायक सुनवाई

ग्वालियर. जेसी मिल से जुड़े हजारों श्रमिकों के लिये राहत भरी खबर है। लगभग 29 साल से लंबित देनदारी और संपत्ति विवाद अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। हाईकोर्ट में जल्द ही इस प्रकरण पर निर्णायक सुनवाई होने की संभावना है। बुधवार का जस्टिस जीएस अहलूवालिया के अवकाश पर होने की वजह से ससुनवाई नहीं हो पाई है। तारीख आगे बढ़ा दी गयी है। अब जस्टिस अहलूवालिया की बेंच ही अंतिम बहस सुनकर फैसला सुनायेगी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई नियमित बेंच से करने का निर्णय लिया है।
जेसी मिल का 1997 से लंबित है मामला
यह विवाद साल 1987 से लंबित है। इसके चलते न तो मिल की संपत्तियों का पूरी तरह से निपटारा हो पाया है। और न ही श्रमिकों को उनका पूरा भुगतान मिल सका है। बुधवार को मामला जस्टिस मिलिंद रमेश फडके की बैंच में सूचीबद्ध था। लेकिन बैंच ने इसे रेगुलर बेंच के लिये ही निर्धारित रखा है। इस दौरान कई बैंक भी पक्षकर बन चुके है। अपनी देनदारी का दावा कर रहे है।
जमीन और देनदारी का विवाद
जेसी मिल बंद होने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर परिसमापक नियुक्त किया गया था। शासन द्वारा लीज पर दी गई जमीन सरकार को वापस मिल चुकी है, लेकिन मिल की निजी स्वामित्व वाली जमीन अभी भी विवाद में है। सरकार चाहती है कि इस जमीन को नीलाम कर मजदूरों की देनदारी चुकाई जाए। वहीं, मजदूर परिवार वर्षों से अपने हक का इंतजार कर रहे हैं। हाईकोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अब इस मामले में अनावश्यक तारीखें नहीं दी जाएंगी। रेगुलर बेंच में सुनवाई शुरू होते ही अंतिम बहस होगी और जल्द फैसला आने की उम्मीद है। मजदूरों को उम्मीद है कि इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद का अंत होगा और उनके भुगतान का रास्ता साफ हो सकेगा।

