ट्रम्प ने वेपन सिस्टम ऑफिसर को बचाने के लिये 155 फायटर प्लेन उतारे, दुश्मन की धरती पर 48 घंटे लड़ा अमेरिकी सैनिक
नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आग धधक रही है। इस युद्ध के बीच अमेरिकी एफ-15 फायटर जेट ईरान की जमीन पर गिर गया था। लेकिन जो हुआ उसके बाद वह किसी फिल्म की स्टोरी से कम भी नहीं है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्वयं सामने आकर बताया कि उनकी सेना ने कैसे दुश्मन के इलाके में घुसकर अपने घायल सैनिक को वापिस लाये। पिछले गुरूवार की रात अमेरिकी एयरफोर्स का एक एफ-15 फायटर जेट ईरान के अन्दर गिर गया। यह विमान ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत मिशन पर था। विमान में 2 लोग सवार थे। जिनमें एक पायलट और दूसरा वेपन सिस्टम ऑफिसर (डब्ल्यूएसओ) जब विमान गिरा तो दोनों ने इजेक्ट कर लिया। यानी विमान से बाहर निकले ओर दोनों अलग -अलग जगहों पर जा गिरे। विमान की रफ्तार इतनी अधिक कि कुछ सेकेण्ड के फर्क से दोनों के बीच कई किलोमीटर की दूरी बन गयी।
पायलट को पहले बचाया
पहली रेस्क्यू टीम ने पायलट को ढूंढ कर उसे एचएच-60 जॉली ग्रीन हेलीकॉप्टर की सहायता से सुरक्षित बाहर निकल लिया और डब्ल्यूएसओ अभी भी दुश्मन के इलाके में फंसाथा और हालात बेहद खतरनाक थे।
155 विमान उतार दिए एक जान बचाने के लिए
जब दूसरे रेस्क्यू ऑपरेशन की बारी आई तो अमेरिका ने पूरी ताकत झोंक दी. इस मिशन में कुल 155 विमान शामिल थे, जिनमें 4 बॉम्बर, 64 फाइटर जेट, 48 रिफ्यूलिंग टैंकर और 13 रेस्क्यू विमान थे। दुश्मन को उलझाने के लिए अलग-अलग जगहों पर टीमें एक्टिव दिखाई गईं ताकि असली जगह का पता न चले. भारी गोलीबारी के बीच सेना ने उस अधिकारी को सुरक्षित निकाल लिया और बिना किसी बड़े नुकसान के वापस आ गई। WSO यानी दूसरा अधिकारी बुरी तरह घायल था. उसके आसपास ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड और स्थानीय आतंकी संगठन मौजूद थे. ऐसे में उसने अपनी ट्रेनिंग याद की और खुद को बचाने की कोशिश शुरू की.वो घायल होने के बावजूद पहाड़ी इलाके में ऊपर की तरफ चढ़ता रहा ताकि दुश्मन उस तक न पहुंच सके.खून बह रहा था, फिर भी चट्टानें चढ़ता रहा. खुद अपने जख्मों पर पट्टी बांधी और अपने पास मौजूद एक खास लोकेशन ट्रांसमीटर डिवाइस की मदद से अमेरिकी सेना को अपनी जगह की जानकारी देता रहा. करीब 48 घंटे तक वो दुश्मन की धरती पर छिपकर बचता रहा ।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना का एक ही सिद्धांत है, हम अपने किसी भी सैनिक को पीछे नहीं छोड़ते. उन्होंने बताया कि पिछले 37 दिनों में अमेरिका ने ईरान के ऊपर 10,000 से ज्यादा उड़ानें भरी हैं और 13,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं। इतने बड़े ऑपरेशन में यह पहली बार था जब कोई अमेरिकी विमान गिरा, लेकिन दोनों सैनिकों को सुरक्षित वापस लाया गया.ट्रंप ने इस ऑपरेशन को सैन्य इतिहास के सबसे बड़े और जोखिम भरे रेस्क्यू मिशनों में से एक बताया और कहा कि यह हमेशा याद रखा जाएगा ।

