MP के 1 लाख कर्मचारियों को झटका, वेतन कटौती केस में SC जाएगी मोहन सरकार
भोपाल. मध्य प्रदेश के करीब एक लाख कर्मचारियों के लिए ये खबर निराशाजनक है। कर्मचारियों के प्रोबेशन पीरियड में वेतन कटौती को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट ने जो फैसला दिया है उसके खिलाफ प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही है। दरअसल, पिछले ही महीने हाईकोर्ट ने तत्कालीन कमलनाथ सरकार के विवादास्पद प्रोबेशन वेतन कटौती नियम को अवैध और भेदभावपूर्ण करार दिया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया था कि जिन कर्मचारियों की सैलरी काटी गई है, उन्हें एरियर्स समेत पूरी राशि लौटाई जाए। अब सरकार यदि सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाती है तो करीब 400 करोड़ रुपए के एरियर भुगतान की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है।

हाईकोर्ट का फैसला
ये नियम नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ कर्मचारियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस दीपक खोत की डिवीजन बेंच ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने प्रोबेशन पीरियड में सरकारी कर्मचारियों का वेतन कम देने के नियम को न केवल गलत, बल्कि भेदभावपूर्ण और नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ माना।
