चीन का गोपनीय न्यूक्लियर टेस्ट गलवान झड़प के 7 दिन बाद किया था
नई दिल्ली. अमेरिका ने एक बड़ा खुलासा करते हुए पहलीबार सार्वजनिक रूप से दावा किया है कि चीन ने वर्ष 2020 में सीक्रेट न्यूक्लियर टेस्ट किया था। यह कथित परीक्षण ऐसे वक्त में हुआ था। जब भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी। पूरी दुनिया कोविड-198 से जूझ रही थी।
यह आरोप अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट थॉमस डिनैनो ने शुक्रवार को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के निरस्त्रीकरण सम्मेलन के दौरान लगाया। खास बात यह है कि यह दावा ऐसे वक्त किया गया है। जब अमेरिका और रूस के बीच अंतिम परमाणु हथियार सीधे 5 फरवरी को खत्म हो चुकी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भविष्य की किसी भी परमाणु संधि में चीन को शामिल करना चाहते है। डिनैनो ने सोशल मीडिया पोस्ट कर कहा था कि अमेरिका के पास खुफिया जानकारी है कि चीन ने वैश्विक निगरानी एजेंसियों की नजर से बचने के लिये गोपनीय तरीके से न्यूक्लीयर टेस्ट किया था। अमेरिकी अधिकारी के अनुसार 22 जून 2020 को चीन ने ऐसा ही एक परीक्षण किया था।
लेकिन ये समय अहम क्यों है?
हालांकि अमेरिका ने सीधे तौर पर इस परमाणु परीक्षण को भारत-चीन सीमा विवाद से नहीं जोड़ा है लेकिन इसका समय बेहद संवेदनशील माना जा रहा है. उस दौर में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर भारी सैन्य तैनाती और आक्रामक गतिविधियां चल रही थीं. दो परमाणु संपन्न देशों के आमने-सामने आने से क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे.कुछ भूराजनीतिक विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि चीन ने वास्तव में ऐसा परीक्षण किया तो उसकी तैयारी महीनों पहले से चल रही होगी. ऐसे में गलवान की घटना, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था. चीन के लिए एक तरह का ‘कवच’ बन गई, जिसके आड़ में वह बिना ज्यादा ध्यान खींचे परमाणु परीक्षण कर सका.चीन को यह सब गुप्त रूप से करना पड़ता, क्योंकि वह कंप्रीहेंसिव न्यूक्लियर टेस्ट बैन ट्रीटी (CTBT) का हस्ताक्षरकर्ता है, जो परमाणु विस्फोटक परीक्षणों पर रोक लगाती है. हालांकि, चीन और अमेरिका दोनों ने ही इस संधि की अब तक पुष्टि नहीं की है.
अमेरिका को चीन से चिंता क्यों?
अमेरिका लंबे समय से चीन के तेजी से बढ़ते परमाणु जखीरे को लेकर चिंतित है. माना जाता है कि चीन के पास करीब 600 परमाणु हथियार हैं. पिछले साल नवंबर में राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि चीन और पाकिस्तान परमाणु परीक्षण कर रहे हैं और इसी आधार पर उन्होंने अमेरिकी सेना को दोबारा परीक्षण की तैयारी के आदेश दिए थे.
ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा था कि रूस परीक्षण कर रहा है और चीन भी परीक्षण कर रहा है लेकिन वे इस पर बात नहीं करते. इसी वजह से ट्रंप चाहते हैं कि रूस के साथ होने वाले किसी भी भविष्य के परमाणु समझौते में चीन को भी शामिल किया जाए. शीतयुद्ध के दौर में परमाणु हथियारों की होड़ पर लगाम लगाने वाली संधि की मियाद खत्म होने से वैश्विक हथियार दौड़ की आशंका बढ़ गई है.

