जेसी मिल्स-34 साल बाद राहत…7839 मजदूरों को मिलेगा 4% ब्याज
ग्वालियर • 102.36 करोड़ पर ब्याज मिलेगा, 188.88 करोड़ के अतिरिक्त दावे निरस्त
ग्वालियर-जेसी मिल्स बंद होने के 34 साल बाद आखिरकार हजारों मजदूरों के बकाये का हिसाब तय हो गया। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 7839 पूर्व कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए उनके 102.36 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों पर मिल बंद होने (28 अप्रैल 1992) से कंपनी के परिसमापन आदेश (4 मई 1998) तक 4 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने का आदेश दिया है। 4 प्रतिशत की दर से मजदूरों को करीब 24 से 25 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलने का अनुमान है। यानी औसतन हर कर्मचारी को लगभग 30 से 32 हजार रुपये अतिरिक्त मिल सकते हैं। हालांकि, अंतिम राशि प्रत्येक कर्मचारी के स्वीकृत दावे के अनुसार तय होगी।
स्वीकृत
4% ब्याज अब मंजूर। इसके अलावा पीएफ, वेतन, महंगाई भत्ता, ग्रेच्युटी, रिट्रेंचमेंट मुआवजा पहले ही स्वीकृत हो चुके हैं।
खारिज
नोटिस पे, बोनस, लीव पे, यात्रा भत्ता और क्लॉथ अलाउंस।
जेसी मिल्स के मजदूरों को मिलेंगे 24-25 करोड़ अतिरिक्त
दूसरी ओर मजदूर कांग्रेस को इस मामले में बड़ा झटका लगा। हाईकोर्ट ने संगठन की ओर से 17 साल बाद किए गए 188.88 करोड़ रुपये के अतिरिक्त दावे पूरी तरह खारिज कर दिए। अदालत ने साफ कहा कि जिन मदों पर त्रिवेदी समिति 2009 में फैसला दे चुकी थी, उन्हें दोबारा नहीं खोला जा सकता।
कोर्ट ने यह भी माना कि संगठन ने अपने आवेदन में यह तथ्य छिपाया कि इन दावों पर पहले ही निर्णय हो चुका है। इसी आधार पर अदालत ने संगठन के आचरण पर आपत्ति जताते हुए भविष्य में सावधानी बरतने की सलाह दी।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि त्रिवेदी समिति ने कर्मचारियों के पीजबकि नोटिस पे, बोनस, लीव पे, यात्रा भत्ता और क्लॉथ अलाउंस जैसे दावे इसलिए खारिज किए गए थे, क्योंकि मिल बंद रहने के दौरान कर्मचारियों ने वास्तविक काम नहीं किया था। अदालत ने कहा कि इन मदों पर वर्षों बाद दोबारा दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अब हाईकोर्ट ने आधिकारिक परिसमापक को स्वीकृत राशि और ब्याज का भुगतान कर्मचारियों अथवा उनके वैध उत्तराधिकारियों के बैंक खातों में पहचान सत्यापन के बाद करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि 4 मई 1998 के बाद की अवधि का ब्याज अभी नहीं मिलेगा। इस पर फैसला तभी होगा, जब सभी स्वीकृत दावों और सुरक्षित लेनदारों का भुगतान होने के बाद परिसमापन निधि में अधिशेष राशि बची होगी।एफ, वेतन, महंगाई भत्ता, ग्रेच्युटी और रिट्रेंचमेंट मुआवजे के दावे पहले ही स्वीकार कर लिए थे।

