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नगरनिगम अब सरकारी भवनों से भी वसूलेगा सेवा शुल्क, 300 करोड़ की वसूली का अनुमान, 30 मार्च तक चलेगा अभियान

ग्वालियर. नगर निगम ने अपनी फायनेंसिंग हालात को सुधारने के लिये बड़ा फैसला लिया है। अब शहर में कलेक्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक कार्यालय सहित सभी सरकारी भवनों से भी ‘‘सव्रिस टैक्स’’ (सेवा शुल्क) वसूली की जायेगी। इस फैसले के बाद नगर निगम केलिये लगभग 300 करोड़ रूपये की वसूली का रास्ता साफ हो गया है। अभी हाल ही में जीवाजी विश्ववि़द्यालय से संपत्तिकर की वसूली की गयी है। निगम लम्बे समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। शहर में पानी, सफाई, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत सुविधाओं पर भारी खर्च होता है। लेकिन पर्याप्त राजस्व नहीं मिलने से विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे थे। ऐसे में राज्य सरकार के निर्देश पर अब सरकारी संस्थानों को भी निजी संस्थानों की तरह की सेवाओं के बदले शुल्क देना होगा।
वसूली के लिये सुप्रीमकोर्ट के आदेश को बनाया आधार
इस फैसले का आधार सुप्रीम कोर्ट का वर्ष 2009 का फैसला बना है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि नगरीय निकाय अपनी सेवाओं के बदले सरकारी संपत्तियों से भी शुल्क वसूल सकते है। इसी के तहत सेवा शुल्क 33-75 तक तय किया जा सकता है।
प्रतिदिन होगी कार्यवाही, 30 मार्च तक चलेगा वसूली अभियान
नगरनिगम ने बड़े बकायादरों की लिस्ट तैयार कर ली है। प्रतिदिन कार्यवाही के निर्देश दिये गयेहै। मार्च के अंत तक लक्ष्य पूरा करने पर जो र दिया जा रहा है। अपर आयुक्त प्रदीप तोमरके अनुसार 30 मार्च तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। टीमों को मैदान में उतारा गयाहै। बकायादारों से लगातार संपर्क किया जा रहा है। कई लोगों को नोटिस दिये हैं। जबकि कुछ मामले में हाईकोर्ट तक भी पहुंच गये है। नगर निगम का मानना है कि इस सख्त अभियान से न केवल राजस्व बढ़ेगा। बल्कि शहर के विकास कार्यो को भी नयी गति मिलेगी।
नगर निगम की जांच में सामने आया है कि शहर में करीब 10 हजार संपत्तियों पर 410 करोड़ रुपए से अधिक बकाया है। इसमें लगभग 300 करोड़ रुपए सिर्फ शासकीय विभागों पर ही लंबित हैं। यदि इस राशि की वसूली हो जाती है, तो निगम की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार संभव है।
वसूली को लेकर निगम प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कम वसूली वाले क्षेत्रों में कार्रवाई भी शुरू हो गई है। दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में तीन राजस्व निरीक्षकों का एक दिन का वेतन काटा गया है, जबकि कई कर संग्राहकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

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