राशन का बजट बिगड़ा, दालें, तेल और शक्कर 20% तक महंगे
ग्वालियर. ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का सीधा असर अब शहर के लोगों के आम बजट और रसोई पर दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें उछलने से माल भाडे और लाजिस्टिक्स लागत में भारी बढोतरी हुई है। नतीजतन अप्रैल महीने से लेकर अब तक शहर के थोक व खेरीज किराना बाजार में दालें, खाद्य तेल, मसाले और डिब्बा बंद राशन सामग्री 5 से 20 प्रतिशत तक महंगी हो चुकी है।
रोजाना इस्तेमाल होने वाले राशन सामानों की कीमतें बढी
स्थानीय दाल बाजार में महाराष्ट्र, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों से आने वाले माल की आवक घटी है। जबकि ट्रक भाडा काफी बढ गया है। इसके साथ ही पिछले 2025 से 2026 में मौसम खराब रहा और इसका असर भी सरसों सहित दलहन फसलों पर पडा। इन सभी वजहों से रोजाना इस्तेमाल होने वाले राशन सामानों की कीमतें बढ गई है जिससे आम उपभोक्ता का मासिक बजट पूरी तरह गडबडा गया है।
कई कंपनियों ने पैकेट उन के अंदर के वजन में कटौती कर दी
पिछले दो माह में शक्कर की कीमत में भी पांच से छह रुपये बढे हैं। पहले शक्कर 42 रुपये प्रति किलो थी, लेकिन वर्तमान में यह 47 रुपये प्रति किलो मिल रही है। सिर्फ तेल और दाल ही नहीं, बल्कि पैकेजिंग कास्ट बढ़ने के कारण बड़ी एफएमसीजी कंपनियों ने भी दरें बढ़ा दी हैं। ब्रेड, बिस्किट, नमकीन, चिप्स और मसालों के पैकेटों पर कंपनियों ने सीधी 10 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है। कई कंपनियों ने पैकेट की कीमतें समान रखकर उनके अंदर के वजन में कटौती कर दी है, जिससे ग्राहकों पर दोहरी मार पड़ रही है।
गेहूं की दरें भी बढ़ी
बाहरी मंडियों से आने वाली आवक पर भाड़े का असर सीधे दालों की कीमतों पर दिख रहा है। बीते दो महीनों में शहर के रिटेल बाजार में दालों के भाव इस प्रकार बढ़े हैं। इसका असर सीधे लोगों के खाने पर पड़ा है। जब अप्रैल से मई के बीच में गेहूं की फसल आई थी तो कीमत 2500 से 2700 रुपये प्रति क्विंटल के बीच में थी। लेकिन वर्तमान में गेहूं की कीमत भी 2900 से तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल के बीच में पहुंच गया है। यदि बहुत अच्छी क्वालिटी का गेहूं मसलन सरबती की कीमत भी चार से साढ़े चार हजार रुपये प्रतिक्विंटल के बीच में है।

