मुरार जिला अस्पताल में दवाओं का संकट, गरीब मरीज बाहर से दवाएं खरीदने को मजबूर
ग्वालियर. जिला अस्पताल मुरार की न्यूरो ओपीडी में इलाज और परामर्श के लिए आने वाले मरीजों को अस्पताल की दवा वितरण खिड़की से जरूरी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। चिकित्सक से परामर्श लेने के बाद जब मरीज दवा लेने पहुंचते हैं, तो दवाएं उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उन्हें निजी मेडिकल स्टोर से खरीदना पड़ रही है। दर्द से राहत और गैस संबंधी दवाओं की उपलब्धता भी प्रभावित बताई जा रही है।
कई मरीज अस्पताल के भरोसे
न्यूरो ओपीडी में प्रतिदिन करीब 60 से अधिक मरीज उपचार और परामर्श के लिए पहुंचते हैं। इनमें ऐसे मरीज भी शामिल हैं, जो लंबे समय से न्यूरो संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं और जिन्हें नियमित रूप से दवाओं का सेवन करना पड़ता है। अस्पताल में दवा नहीं मिलने पर इन मरीजों को बाहर से दवा खरीदने की मजबूरी बन रही है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीज सरकारी अस्पताल में इस उम्मीद से पहुंचते हैं कि उन्हें जांच, चिकित्सकीय परामर्श के साथ जरूरी दवाएं भी अस्पताल से मिल जाएंगी, लेकिन दवाएं उपलब्ध नहीं होने पर उन्हें निजी मेडिकल स्टोर का रुख करना पड़ता है।
स्टाक व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
न्यूरो ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या को देखते हुए जरूरी दवाओं की उपलब्धता बनाए रखना अहम है। मरीजों की परेशानी यह है कि सरकारी अस्पताल में उपचार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दवा के लिए उन्हें निजी मेडिकल स्टोर जाना पड़ रहा है। ऐसे में दवा आपूर्ति और स्टाक प्रबंधन को नियमित रखने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि मरीजों को उपचार के साथ जरूरी दवाएं भी अस्पताल परिसर में ही उपलब्ध हो सकें।

