‘रामाष्टकम्’ की भक्ति, ‘तराना’ की लय और ‘बरखा ऋतु आई, आई साँवरिया’ के सावन-श्रृंगार ने बिखेरे कथक के विविध रंग
ग्वालियर -राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय, ग्वालियर के स्थापना दिवस समारोह में बुधवार को कथक नृत्य विभाग की विशेष प्रस्तुति “कथक त्रिवेणी” आकर्षण का केंद्र रही। विभाग के भूतपूर्व एवं वर्तमान विद्यार्थियों ने “रामाष्टकम्”, “तराना” तथा “बरखा ऋतु आई, आई साँवरिया” के माध्यम से कथक के भक्ति, शुद्ध नृत्य, लय, भाव और श्रृंगार पक्ष को प्रभावपूर्ण ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया।
तीनों प्रस्तुतियों की संकल्पना, नृत्य निर्देशन एवं कोरियोग्राफी कथक नृत्य विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजना झा द्वारा की गई। भूतपूर्व एवं वर्तमान विद्यार्थियों का एक साथ मंच पर आना प्रस्तुति का विशेष आकर्षण रहा और गुरु–शिष्य परंपरा की निरंतरता को भी रेखांकित किया।
‘रामाष्टकम्’ में साकार हुई श्रीराम की भक्ति
प्रस्तुति का शुभारंभ भगवान श्रीराम को समर्पित “रामाष्टकम्” से हुआ। विभाग के भूतपूर्व छात्र-छात्राओं ने कथक की नृत्यभाषा में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्श, करुणा, शौर्य और आध्यात्मिक स्वरूप को प्रस्तुत किया। भावाभिनय, हस्त-मुद्राओं, पद-संचालन एवं नृत्य-विन्यास ने प्रस्तुति को भक्तिमय स्वरूप प्रदान किया।इस प्रस्तुति में संदीप शर्मा, विनीता कुशवाह, दामिनी सालवी, चंचल वर्मा, अदिति ओझा एवं तरुषी श्रीवास्तव ने सहभागिता की।
‘तराना’ में गूंजी घुंघरुओं की झंकार
दूसरी प्रस्तुति “तराना” में कथक की लयात्मकता, गति और शुद्ध नृत्य पक्ष का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ। तीव्र पद-संचालन, आकर्षक चक्कर, लयकारी एवं समूह नृत्य-विन्यास ने प्रस्तुति को ऊर्जावान बनाया। भूतपूर्व एवं वर्तमान विद्यार्थियों ने संयुक्त रूप से मंच साझा करते हुए कथक की समृद्ध तकनीकी विशेषताओं को प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति में अनन्या सिंह, आन्या सिंह, विवेक जैन, मुस्कान लिखार, विवेक राजावत एवं गरिमा वर्मा ने सहभागिता की।
‘बरखा ऋतु आई, आई साँवरिया’ में मंच पर उतरा सावन
तीसरी प्रस्तुति “बरखा ऋतु आई, आई साँवरिया” ने सावन की रिमझिम, प्रकृति के उल्लास, प्रेम और साँवरिया के आगमन की प्रतीक्षा को कथक के भाव-संसार में साकार किया। कलाकारों ने मुद्राओं एवं भावाभिनय के माध्यम से वर्षा ऋतु की उमंग, हरियाली और नायिका के मन की कोमल अनुभूतियों को सुंदरता से अभिव्यक्त किया।

