वंदेभारत बनी लाइफलाइन, धड़कता दिल को अंकलेश्वर से अहमदाबाद तक तेजी पहुंचाया
देश में पहली बार धड़कता दिल लेकर दौड़ी वंदे भारत
नई दिल्ली। एक दिल… वो भी शरीर से बाहर, पर अभी भी धड़क रहा था। उसके पास मंजिल तक पहुंचने के लिए 217 मिनट का समय था और मंजिल 250 किलोमीटर दूर थी। देश में यह पहला मौका था जब धड़कते हुए दिल को रेल से ले जाया गया। वह भी धड़काते हुए चलने वाली वंदे भारत से। रेल ने समय पर दिल को मंजिल तक पहुंचा दिया।
अहमदाबाद पहुंचाना था
ब्रेन डेड घोषित किए गए मिथुन के परिवार ने फैसला किया कि मिथुन के शरीर के अंग दान किए जाएं, ताकि किसी को नया जीवन मिल सके। इसमें दोनों किडनी और लिवर को ट्रांसप्लांट के लिए अलग-अलग अस्पतालों के लिए रवाना किए गए, पर दिल सूरत से अहमदाबाद पहुंचाना था।
रेल का रास्ता चुना…
आमतौर पर दिल ट्रांसपोर्ट के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाता है। मौसम अनुकूल होने के लिए एयर एम्बुलेंस का सहारा लिया जाता है, पर इस बार हालात अलग थे। बारिश की मार से सड़कों पर यातायात प्रभावित था। हवाई सेवाएं भी लड़खड़ाई हुई थीं, इसलिए तय हुआ कि दिल अपना सफर रेल से तय करेगा। यह सफर 217 मिनट में पूरा हुआ और अहमदाबाद पहुंचते ही सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट भी कर दिया गया।

