JAH में मारपीट, मरीजों को इलाज नहीं, लंबी लाइनों से बिगड़ रही छवि
प्रबंधन संभाल नहीं पा रहा व्यवस्था, उठ रहे सवाल, JAH ग्रुप और विवाद, चोली-दामन का साथ छूट नहीं रहा
ग्वालियर। JAH ग्रुप हॉस्पिटल प्रबंधन और विवाद के बीच चोली-दामन का साथ छूट नहीं रहा। मरीजों के परिजनों के साथ मारपीट, अभद्रता, सुरक्षाकर्मियों को आए दिन धुन देना, वाहन स्टैंड पर अवैध वसूली, मरीजों को समय पर इलाज न मिलना, गंदगी, वाहन चोरी की घटनाएं, लंबी-लंबी लाइनें लगी रहना सहित अन्य मसलों ने अस्पताल प्रबंधन को पूरी तरह से कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। प्रबंधन की छवि उस हुक्मरान की तरह हो गई है जो देख-सुन तो सब रहा है, लेकिन कर कुछ नहीं पा रहा। इससे कई सवाल उठ खड़े हुए हैं कि अगर संभाल नहीं पा रहे तो कुर्सी छोड़ क्यों नहीं रहे।
सुरक्षाकर्मी को पीटा, दूसरे दिन अटेंडर को धुन दिया
2 दिन पहले हजार बिस्तर अस्पताल में डॉक्टर ने उस जगह गाड़ी खड़ी कर दी जहां वरिष्ठ चिकित्सकों के वाहन खड़े होते हैं। सुरक्षाकर्मी का सिर्फ यही कहना कि सर यहां गाड़ी खड़ी मत करो, अधीक्षक ने मना किया है, उस पर भारी पड़ गया। डॉक्टरों ने सुरक्षाकर्मी को पीट-पीट कर बेहाल कर दिया। इसके विरोध में सुरक्षाकर्मी अनशन पर बैठ गए और कार्रवाई की मांग करने लगे। जैसे-तैसे मामला सुलझा ही था कि दूसरे दिन एक्सरे कक्ष में मरीजों के परिजन के साथ मारपीट कर दी। परिजनों ने इसकी शिकायत प्रबंधन से की तो उन्हें टरका दिया गया। वाहन स्टैंड से अवैध वसूली की शिकायतें कम होने की जगह दिनों-दिन बढ़ती जा रही हैं, प्रबंधन कुछ कर नहीं पा रहा।
वीडियो बनाया तो उल्टे सुरक्षाकर्मी
3 दिन पहले हजार बिस्तर अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजन ने कुव्यवस्थाओं को उजागर करने के लिए तीसरी मंजिल पर बने बाथरूम का वीडियो बना लिया। इस वीडियो को देखकर पता चला कि बाथरूम की सफाई हुए महीनों बीत चुके हैं। यह वीडियो बाहर आया तो सुरक्षाकर्मी उस व्यक्ति को ही भला-बुरा कहने लगे कि बिना परमिशन के कैसे बनाया। इस वीडियो ने जेपीएच प्रबंधन की कलई खोलकर सामने ला दी कि सफाई व्यवस्था के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी सफाई हो नहीं रही।
ले जाओ गाड़ी, कोई नहीं रोकेगा
JAH ग्रुप के ट्रॉमा सेंटर, न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी विभाग का परिसर वाहन चोरों की नजर में 24 घंटे रहता है और मौका मिलते ही दो पहिया वाहन उठा ले जाते हैं। कंपू थाने के FIR रजिस्टर पर नजर डालें तो हर दूसरे पन्ने पर बाइक चोरी की रिपोर्ट दर्ज मिलेगी। वह भी जेपीएच परिसर से। सबसे बड़ी बात यह कि वहां के सुरक्षाकर्मी इस बात का बिल्कुल ध्यान नहीं रखते कि वाहन किसका है और उसे ले कौन जा रहा है।

