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किसानों के लिये पेयजल व छाया सहित छाछ व ओआरएस की व्यवस्था करें अपना गेहूँ बेचने में  दिक्कत न आने पाए 

जल गंगा संवर्धन अभियान, सीएम हैल्पलाइन व पराली प्रबंधन सहित शासन के प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों की भी हुई समीक्षा 
ग्वालियर – समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये जिले में स्थापित किए गए सभी 37 खरीदी केन्द्रों का संबंधित एसडीएम स्वयं निरीक्षण करें। प्रत्येक खरीदी केन्द्र पर किसानों के लिये पेयजल, छाया व पेयजल की पुख्ता व्यवस्था करें। साथ ही छाछ, शरबत व ओआरएस का इंतजाम भी कराएं। प्रत्येक केन्द्र पर प्राथमिक चिकित्सा किट की व्यवस्था भी रहे। यह निर्देश कलेक्टर  रुचिका चौहान ने अंतरविभागीय समन्वय बैठक में गेहूँ उपार्जन व्यवस्था की समीक्षा के दौरान दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक केन्द्र पर ऐसी व्यवस्था बनाएं, जिससे किसानों को अपना गेहूँ बेचने में कोई कठिनाई नहीं आए।   जल गंगा संवर्धन अभियान, ई-विकास प्रणाली, शिक्षा मित्र योजना, प्राकृतिक खेती, पराली व नरवाई प्रबंधन, सीएम हैल्पलाइन, पशुपालन विभाग की क्षीर धारा ग्राम योजना एवं राज्य शासन की अन्य प्राथमिकता वाली योजनाओं की भी समीक्षा की गई।  उपार्जन केन्द्रों पर अग्निशमन यंत्र, रेत, बाल्टियां एवं गेहूँ को ढकने के लिये तिरपाल इत्यादि की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिये भी कहा। साथ ही प्रत्येक केन्द्र पर शिकायत व सुझाव पंजी संधारित करने के निर्देश भी दिए।
जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार कार्य में जनता को भागीदार बनाएं 
समीक्षा के दौरान कलेक्टर  रुचिका चौहान ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि तिघरा सहित   पुराने जलाशयों के गहरीकरण का काम प्रमुखता से करें।   वीरपुर व हिम्मतगढ़ सहित जिले के 8 पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार अभियान के तहत कराया जायेगा।   लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से कहा कि जिले के शेष शासकीय भवनों में अभियान के तहत प्रमुखता के साथ रूफ वाटर हार्वेस्टिंग संरचनायें बनवाएं। छात्रावासों में भी संरचनायें बनवाई जाएं। उन्होंने जिले के सभी नगरीय निकायों में प्रभावशाली लोगों की बैठक लेकर जल संरक्षण के काम कराने पर बल दिया।
खास बातें एवं निर्देश 
जिले के नवाचार शिक्षा मित्र योजना के तहत सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिये 10 हजार बैंच तैयार ।
जिले की शतप्रतिशत दुकानों से ई-टोकन से ही हो खाद का वितरण ।
जो प्राइवेट खाद विक्रेता बगैर ई-टोकन के खाद बेचने की जुर्रत करें, उनका विक्रय लायसेंस निरस्त करें।
पराली व नरवाई जलाने वालों पर अर्थदण्ड लगाएं और एफआईआर भी कराएं।
जिन ग्राम पंचायतों में पराली का प्रबंधन होगा उन्हें मिलेंगे पुरस्कार।
पशु नस्ल में सुधार के लिये क्षीर धारा ग्राम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर।
चिन्हित हाईरिस्क गर्भवती माताओं का लगातार फोलोअप करने के निर्देश।
शिशु एवं मातृ मृत्यु दर पर प्रभावी अंकुश के लिये सभी टीके नियमित रूप से लगाएं।
जिन निजी अस्पतालों से अत्यधिक गंभीर अवस्था के शिशु लगातार एसएनसीयू के लिये रिफर हो रहे हैं उनके संचालकों की बैठक लेकर कारण पता करें।
उद्यानिकी एवं पशुपालन विभाग की हितग्राहीमूलक योजनाओं की लक्ष्य की पूर्ति के लिये अभी से प्रयास हों।
जिले के पशु चिकित्सालयों को बेहतर बनाएं, पशुपालकों के लिये पेयजल व छाया की व्यवस्था रहे।

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