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समय मांगने के बाद भी केस डायरी पेश नहीं करने पर हाईकोर्ट सख्त, एसपी को तलब करने की चेतावनी

ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि अलगी सुनवाई तक केस डायरी पेश नहीं की गयी है। ग्वालियर एसपी को तलब किया जा सकता है। यह मामला हृदेश कुशवाह एवं अन्य बनाम ग्वालियर पुलिस से जुड़ा है। जिसकी सुनवाई जस्टिस अमित सेठ की एकलपीठ में हुई। हाईकोर्ट ने स्पष्टसंकेत दिये कि बार-बार मौका देने के बावजूद केस डायरी पेश न करना गंभीर लापरवाही है। यदि अगली तारीख तक दस्तावेज पेश नहीं किये गये तो सख्त कार्यवाही की जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को तय की गयी है। जहां राज्य पक्ष का हर हाल में केस डायरी प्रस्तुत करनी होगी।
क्या है मामला
मुरार थाना क्षेत्र में वर्ष 2022 में हुई एक कार्रवाई इस पूरे मामले की जड़ है। उस समय पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार कर उनके पास से 720 ग्राम MDMA ड्रग्स बरामद करने का दावा किया था। यह मामला गंभीर धाराओं में दर्ज किया गया, लेकिन जब जब्त किए गए पदार्थ को जांच के लिए लैब भेजा गया तो रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ, जिसे ड्रग्स बताया जा रहा था, वह असल में यूरिया निकला। इस खुलासे के बाद मामले की दिशा बदल गई और कोर्ट ने आरोपियों को जमानत दे दी। साथ ही जांच में लापरवाही मानते हुए संबंधित जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए। इसके बाद आरोपियों ने जिला अदालत में केस समाप्त करने की अर्जी दाखिल की, लेकिन अदालत ने उसे खारिज कर दिया। जिला अदालत के इस फैसले के खिलाफ आरोपियों ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की शरण ली और पुनरीक्षण याचिका दायर की। अब इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष द्वारा केस डायरी प्रस्तुत न करने को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
बार-बार समय मांगा फिर भी पेश नहीं की डायरी
सुनवाई के बीच राज्य पक्ष के एडवोकेट ने एक बार फिर केस डायरी प्रस्तुत करने के लिये समय मांगा, जिसका आवेदक पक्ष ने विरोध किया। उन्होंनंे तर्क दिया कि यह स्थानीय मामला है और पहले भी 10-18 मार्च को समय दिया जा चुका है। बावजूद इसकी केस डायरी पेश नहीं की गयी है।

 

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