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विक्रम नव संवत्सर का जिला स्तरीय कार्यक्रम बाल भवन में हुआ आयोजित 

विक्रमादित्य पर केन्द्रित नाट्य मंचन भी हुआ 
ग्वालियर – भारतीय नववर्ष चैत्र शुल्क प्रतिपदा, विक्रम नव संवत्सर-2083 के शुभारंभ अवसर पर जिला स्तरीय कार्यक्रम गुरुवार को बाल भवन में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा उदयीमान सूर्यदेव को अर्घ दिया और हिन्दू वर्ष पर विक्रम ध्वज का पूजन-अर्चन किया। इस मौके पर कलाकारों द्वारा राजा विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित नाट्य की प्रस्तुति दी गई।
कार्यक्रम में संत कृपाल सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति के अंतर्गत पर्व और त्यौहारों का निर्धारण मंगल तिथियों के आधार पर होता है। खगोलीय गतिविधियों की दृष्टि से गुड़ी पड़वा अर्थात प्रतिपदा वर्ष की पहली मंगल तिथि है। इस मंगल तिथि का अभिवादन चैती चंद, वर्ष प्रतिपदा और गुड़ी पड़वा के नाम से किया जाता है।
कार्यक्रम में पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर ने कहा कि हिंदू संस्कृति में गुड़ी पड़वा (नव संवत्सर) के दिन से ही नए वर्ष की शुरूआत होती है। इस दिन हम सब सूर्य को अर्घ देकर सभी की खुशहाली और समृद्धि की कामना करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा सम्पूर्ण प्रदेश में विक्रम नव संवत्सर आयोजन की जो शुरूआत की गई है वह अनुकरणीय है। इससे युवाओं को भारतीय संस्कृति की जानकारी मिलेगी। ग्वालियर में नव संवत्सर के अवसर पर सभी को उन्होंने शुभकामनायें दीं।
विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित नाटक की हुई प्रस्तुति
विक्रम नव संवत्सर-2083 के प्रारंभ पर आयोजित कार्यक्रम में संस्कृति विभाग द्वारा राजा विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित नाटक भी प्रस्तुत किया गया। संस्कृति विभाग की ओर से नरेन्द्र नाट्य एवं लोक कला समिति ग्वालियर के निदेशक हिमांशु द्विवेदी के नेतृत्व में कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए नाट्य का श्रोताओं ने भरपूर आनंद लिया और भूरि-भूरि प्रशंसा की। इस नाटक के माध्यम से राजा विक्रमादित्य के जीवन दर्शन को प्रदर्शित किया गया।

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