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ईरान में प्रदर्शनकारियों पर खामनेई की सेना ढहाया जुल्म, 35 की मौत 1200 हिरासत में

तेहरान. ईरान में बढ़ती महंगाई और डांवाडोल अर्थव्यस्था के चलते आम जनजीवन बुरी तरह से अस्त-व्यस्त हुआ है। इसे लेकर वहां की जनता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाले इस्लामिक शासन के खिलाफ सड़कों पर उतर आयी है। पिछले कई हफ्तों से देश की राजधानी तेहरान, इस्फहान, मशहद, शिराज, कोम जैसे प्रमुख शहरों में लोग इस्लामिक शासन से मुक्ति के लिये विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने ‘‘डेथ टू खामेनेई और मुल्लाओं को छोड़ना होगा देश’’ जैसे नारे लगा रहे हैं।
ईरान की मौजूदा सरकार ने अपने खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक जन आन्दोलन मानने से मना किया है। इसे विदेशी साजिश बताया है। खामनेई के नेतृत्व वाले शासन की ओर से इस जनविद्रोह को बलपूर्वक दबाने का प्रयास किया जा रहा है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई ने 2 दिन पूर्व चेतावनी देते हुए कहा था कि दंगाईयों को उनकी जगह दिखायेंगे, न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने स्थानीय एक्टिविस्ट के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंिसा में मृतकों की संख्या बढ़कर कम से कम से 34 हो गयी है। 1200 से ज्यादा लोग हिरासत में लिये गये है। इन प्रदर्शनों के कोई संकेत नहीं दिखाई दे रहे है।
2022 के बाद से ईरान में सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन
ये 2022 के बाद से ईरान में सबसे बड़े और व्यापक विरोध प्रदर्शन हैं, जब पुलिस हिरासत में 22 वर्षीय महसा अमिनी की मौत ने देशव्यापी प्रदर्शनों को जन्म दिया था।  अमिनी को हिजाब या सिर पर स्कार्फ नहीं पहनने के कारण हिरासत में लिया गया था।  हाल के वर्षों में ईरान को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के कई दौरों का सामना करना पड़ा है।  अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कड़े होने और इजरायल के साथ 12 दिनों के युद्ध के बाद ईरान की आर्थिक स्थिति बिगड़ने के कारण दिसंबर में उसकी मुद्रा रियाल का मूल्य गिरकर 1 डॉलर के मुकाबले 14 लाख रियाल तक पहुंच गया. इसके तुरंत बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।
खामेनेई शासन को धमकाया
हालिया विरोध प्रदर्शन कितना व्यापक और बड़ा है, इसका आकलन करना मुश्किल रहा है. क्योंकि ईरान में मीडिया सरकार के नियंत्रण में है और सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बारे में बहुत कम जानकारी सामने आ पा रही है।  इंटरनेट और सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो में सड़कों पर लोगों की धुंधली और अस्पष्ट झलकियां या गोलियों की आवाज ही सुनाई देती है।  ईरान में पत्रकारों को रिपोर्टिंग में कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि देश भर में यात्रा करने के लिए अनुमति लेना, साथ ही अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न या गिरफ्तारी का खतरा।

 

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