हाईकोर्ट की लोक अदालत ने पीड़ित पक्षकारों को दिलाया 5 करोड़ एक लाख तिहत्तर हजार से अधिक अतिरिक्त क्षतिधन कुल 434 प्रकरणों का हुआ निराकरण
ग्वालियर – उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर में शनिवार को आयोजित हुई नेशनल लोक अदालत में 434 प्रकरणों का निराकरण किया गया। साथ ही मोटर दुर्घटना क्लेम अपील प्रकरणों में पीड़ित पक्षकारों को लगभग 5 करोड़ एक लाख 74 हजार रूपए का अतिरिक्त क्षतिधन दिलाया गया। नेशनल लोक अदालत का आयोजन मुख्य न्यायाधिपति एवं मुख्य संरक्षक राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशन एवं उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर के प्रशासनिक न्यायाधिपति आनंद पाठक के मार्गदर्शन में किया गया।
उच्च न्यायालय की नेशनल लोक अदालत में प्रकरणों के निराकरण के लिए प्रशासनिक न्यायाधिपति श्री आनंद पाठक व सीनियर एडवोकेट केएन गुप्ता तथा न्यायाधिपति श्री मिलिंद रमेश फड़के व एडवोकेट श्री संजय द्विवेदी की खण्डपीठों ने आपसी सहमति के आधार पर प्रकरणों का निराकरण किया।
निराकृत प्रकरणों में से एक प्रकरण इस प्रकार है कि वर्ष 2015 में 30 जुलाई को आवेदक अपने पिता के साथ मुरार से ग्राम अकलोनी जा रहा था। मोटर साइकिल को आवेदक के पिता अपनी साहड में धीमी गति से चला रहे थे। रास्ते में एक स्थान पर रूकने पर आवेदक मोटर साइकिल के पास खड़ा हुआ था। उसी समय लापरवाहीपूर्वक मोटर साइकिल चलाकर आ रहे अनावेदक ने सड़क पर एक महिला को टक्क्र मारी और भागने के चक्कर में आवेदक को भी टक्कर मार दी। इस टक्कर से आवेदक के पेट में गंभीर चोट आई और उसकी किडनी भी क्षतिग्रस्त हो गई। साथ ही अन्य चोटें भी आईं। इस पर आवेदक ने क्षतिपूर्ति की धनराशि में वृद्धि के लिये उच्च न्यायालय में अपील की। उच्च न्यायालय खण्डपीठ में लगी नेशनल लोक अदालत ने पाँच लाख रूपए की वृद्धि कर दी है।
लोक अदालत में हुए निराकरण से दोनों पक्षों के बीच का विवाद बिना किसी हार-जीत के समाप्त हो जाता है। इसी मूल भावना को आधार बनाकर प्रशासनिक न्यायाधिपति माननीय न्यायमूर्ति आनंद पाठक के मार्गदर्शन में ग्वालियर हाईकोर्ट में नेशनल लोक अदालत के आयोजन से पूर्व उच्च न्यायालय में विचाराधीन राजीनामा योग्य प्रकरणों मुख्यत: बीमा कंपनी के प्रकरणों को चिन्हित कर सूची तैयार की गई। इसके बाद बीमा कंपनी के अधिकारी व अधिवक्तागण एवं पक्षकार व उनके अधिवक्तागणों के साथ प्री-सिटिंग कर राजीनामा के आधार पर प्रकरणों के निराकरण के लिये सहमति बनाई गई। इसके फलस्वरूप 232 क्लैम प्रकरणों सहित कुल 434 प्रकरणों का लोक अदालत में निराकरण किया गया है।

