मेडिकल एजुकेशन स्केम का बड़ा खुलासा, MP से दिल्ली तक फंसे बड़े अफसर
इंदौर. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) ने मेडिकल शिक्षा से जुड़े एक बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा किया है। इसमें स्वास्थ्य मंत्रालय, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी), निजी मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधि और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूसीसी) के पूर्व अध्यक्ष तक शामिल हैं। सीबीआइ ने एफआइआर दर्ज की है। फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआइ) के अध्यक्ष मोंटू कुमार पटेल पर भी फार्मेसी कॉलेजों को मान्यता देने में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। सीबीआइ के मुताबिक, मेडिकल कॉलेजों को मान्यता देने और निरीक्षण में घोटाला हुआ। गोपनीय जानकारी जैसे निरीक्षण की तिथि, मूल्यांकनकर्ता के नाम कॉलेजों को लीक की जाती थी। इससे कॉलेजों को फर्जी इंतजाम करने का समय मिल जाता था- जैसे नकली शिक्षक रखना, मरीजों की झूठी जानकारी देना, बायोमेट्रिक उपस्थिति से छेड़छाड़ और निरीक्षकों को रिश्वत देना।
सीबीआइ का आरोप है कि सरकारी अफसर, बिचौलिए और कॉलेज के प्रमुख मिलकर आपराधिक साजिश रच रहे थे। वे गोपनीय दस्तावेजों की तस्वीरें लेकर बिचौलियों के जरिए निजी कॉलेजों तक पहुंचा रहे थे। एफआइआर में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के चांसलर और पूर्व यूजीसी अध्यक्ष डीपी सिंह का नाम है। इसके अलावा इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन सुरेश सिंह भदौरिया और उदयपुर के गीतांजलि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार मयूर रावल के नाम भी सामने आए हैं।

