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महालक्ष्मी जी का मंदिर इंटेलियन गोल्ड पत्थर से किशनगढ़ (राजस्थान) के कारीगरों ने संजाया गया

ग्वालियर. जौरासी हनुमान मंदिर के भक्तों के द्वारा दान दी गयी राशि 14 करोड़ रूपये लागत से महाअष्टलक्ष्मीजी के मंदिर के निर्माण के लिये समिति ने किसी भी खास व्यक्ति से चन्दा नहीं मांगा हे। वर्ष 2003 ने हनुमान जी के मंदिर में आने वाली दानदाताओं की राशि का उपयोग ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने मंदिर के विस्तार पर करना शुरू किया। सबसे पहले जौरासी के हनुमान जी के मंदिर को भव्य स्वरूप दिया। इसके बाद मंदिर से लगी जमीन खरीदी फिर महालक्ष्मी जी के मंदिर का शुभारंभ होने के बाद यहां भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। मंदिर से इटेलेयन गोल्ड काम किशनगढ़ राजस्थान के कारीगरों ने किया है। नवरात्रि में यहां वृन्दांवन से आये विद्वान पंडि़तों द्वारा नवचंडी महारूज्ञ किया जा रहा है।
शहर के विकास में आई तेजी
अष्टमहालक्ष्मी धाम के निर्माण के शुरू होते ही शहर में विकास में तेजी आई है। एयरपोर्ट का विस्तार पूरा हुआ है। शंकरपुर के नये स्टेडियम में भारत बांग्लादेश के बीच टी-20 क्रिकेट मैच भी खेला गया। आईएसबीटी बस स्टेण्ड जल्द शुरू होने वाला है। शहन में नये मॉल और मार्केट भी खुल रहे हैं।
विकास कार्यो में आई तेजी
ग्वालियर में महालक्ष्मी मंदिर के बाद औद्यौगिक क्षेत्रों के विकास में तेजी आई है। मंदिर बनने के बाद नया क्रिकेट स्टेडियम दिव्यांग खेल परिसर और एयरपोर्ट का विस्तार हुआ है। मंदिर का पूर्ण प्रभाव 3 साल बाद दिखाई देने लगेगा। पंडित विजयभूषण वेदार्थी, ज्योतिषाचार्य
दानदाताओं द्वारा चढ़ाई राशि से महालक्ष्मी मंदिर का निर्माण
महालक्ष्मी मंदिर निर्माण के लिये किसी से भी दान नहीं लिया है। जौरासी मंदिर के भक्तों द्वारा 21 वर्षो में मंदिर में चढ़ाये धन से महालक्ष्मी मंदिर का निर्माण किया गया है। 14 करोड़ से 3 बीघा जमीन में महालक्ष्मी जी का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है।
सुरेश चतुर्वेदी, अध्यक्ष ट्रस्ट हनुमार मंदिर जौरासी

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