मप्र में अक्टूबर में उपचुनाव संभावित, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने प्रारंभिक तैयारियां पूरी की
भोपाल. मध्यप्रदेश के 27 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव अक्टूबर में कराए जा सकते है इसके लिए राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने प्रारंभिक तैयारियां पूरी कर ली है। कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते हुए मतदान केंद्रों की अधिकतम मतदाता संख्या 1000 तक सीमित की जा रही है। उपचुनाव के लिए 2500 से ज्यादा मतदान केंद्र बढ़ाए जा रहे है।
चुनाव कार्य के लिए अधिकारी व कर्मचारी भी चिन्हित किए
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की पहले दौर की जांच पूरी कराई जा चुकी है। चुनाव कार्य के लिए अधिकारी और कर्मचारी भी चिन्हित कर लिए गए है। चुनाव आयोग से दिशा-निर्देश मिलते ही आगे की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि उपचुनाव कराने के लिए जो भी प्रारंभिक तैयारियां करनी होती है वह की जा चुकी है। अभी उपचुनाव वाले 27 विधानसभा क्षेत्रों में 6700 के आसपास मतदान केंद्र है। इनकी संख्या 2500 से ज्यादा बढ़ेगी। अधिकांश कलेक्टरों ने इसके प्रस्ताव भी दे दिए है जिनका परीक्षण कर अंतिम निर्णय के लिए चुनाव आयोग को भेजा गया है।
ईवीएम व वीवीपैट की पहले दौर की जांच करा ली गई
चुनाव कराने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों ने कर्मचारी चुन लिए है। वहीं उपचुनाव में लगने वाली ईवीएम और वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) की पहले दौर की जांच करा ली गई है। मतदान केंद्र में अन्य जो व्यवस्थाएं लगती है उसके संबंध में चुनाव आयोग से मार्गदर्शन अभी प्राप्त नहीं हुआ है। इसके आधार ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।
चुनाव आयोग जल्द जारी करेगा दिशा-निर्देश
जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग मतदान कराने को लेकर जल्द ही दिशा-निर्देश भेजने वाला है। इसको लेकर सभी राष्ट्रीय राजनीतिक दलों से सुझाव लिए जा चुके है। इसके आधार पर आयोग प्रक्रिया तय करेगा जिसके तहत चुनाव संचालन होगा।
कोरोना की स्थिति पर रखी जा रही नजर
इस बार राजनीतिक दलों को चुनाव प्रचार के तौर-तरीके भी बदलने होंगे और इन पर नजर रखने की व्यवस्था भी आयोग को बनानी होगी। संभावना जताई गई है कि आयोग अक्टूबर में त्योहारों की स्थिति को देखते हुए चुनाव की तारीखें तय कर सकता है। उधर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी उपचुनाव वाले सभी जिलों में कोरोना संक्रमण की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। कलेक्टरों से प्रतिदिन रिपोर्ट बुलवाई जा रही है और इसे चुनाव आयोग को भी भेजा जा रहा है।

