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भोपाल में पकड़े गए 13 PFI सदस्यों को मिली 27 अक्टूबर तक रिमांड, ATS करेगी पूछताछ

भोपाल. भोपाल के पीएफआई के गिरफ्तार 13 सदस्यों से एटीएस पूछताछ करेगी। भोपाल की एनआईए कोर्ट में टेरर फंडिंग के मामले में सभी को पेश किया गया। एटीएस ने पूछताछ के लिए कोर्ट से रिमांड मांगी। कोर्ट ने सभी आरोपियों 27 अक्टूबर तक की रिमांड दी है। गौरतलब है कि पकड़े गए सदस्यों में 12 आरोपी मध्य प्रदेश और एक आरोपी महाराज के औरंगाबाद का है।

क्या है पूरा मामला
26 सिंतबर को एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने 8 राज्यों में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के ठिकानों पर रेड की। इस दौरान 170 से अधिक कार्यकर्ताओं को अरेस्ट किया है। मध्यप्रदेश में भोपाल, उज्जैन, इंदौर समेत 8 जिलों रेड की है। टीम ने 21 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। उनसे लैपटॉप और संदिग्ध दस्तावेज भी जब्त किए हैं। ATS को इन संदिग्धों की जानकारी पूर्व में पकड़े गए 4 आरोपियों की पूछताछ में मिली थी। ATS ने इंदौर से 5 संदिग्धों सईद टेलर, दानिश गौरी, तौसीफ छीपा, यूसुफ और वसीम को पकड़ा। 3 संदिग्ध फरार हो गए। उज्जैन से मंसूरियान मस्जिद का इमाम जुबेर, कारोबारी इसहाक और वकील आकिब को पकड़ा। चौथा संदिग्ध महिदपुर तहसील का रहने वाला है। संदिग्धों से लैपटॉप और कुछ दस्तावेज जब्त किए।
ATS ने PFI के लिए फंडिंग करने के संदेह में SDPI (सोशल डिमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया) के भोपाल स्थित ऑफिस में रेड की है। यहां से SDPI के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल रऊफ को पकड़ा है। SDPI का ऑफिस शाहजहांनाबाद थाने से महज 50 मीटर की दूरी पर है।

सीसीटीवी निकालकर ले गई NIA
कार्रवाई के दौरान 24 से ज्यादा NIA अधिकारी मौजूद थे। इनमें 11 लेडी अधिकारी भी थीं। सुबह 7 बजे तक कार्रवाई चली। जिस बिल्डिंग में PFI का दफ्तर है, वहां जिम भी संचालित होता है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सुबह सभी जिम और दुकानें समय पर खुलीं। NIA बिल्डिंग में लगे सीसीटीवी और फुटेज भी बरामद करके ले गई है।

MP में 25 जिलों में फैला है नेटवर्क
MP के 25 जिलों फैला है PFI, इससे सिमी मेंबर भी जुड़े एमपी में इंदौर से 3 और उज्जैन से 1 सहित PFI के कुल 4 मेंबर गिरफ्तार किए गए हैं, लेकिन इसका नेटवर्क प्रदेश के 25 जिलों में फैला है। सबसे खतरनाक बात ये है कि इसमें से ज्यादातर जिले वही हैं, जहां पहले प्रतिबंधित संगठन सिमी सक्रिय हुआ करता था। उससे भी ज्यादा खतरनाक बात ये है कि सिमी के एक्टिव मेंबर PFI में शामिल हो चुके हैं। ऐलानिया तौर पर PFI भले ही अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए बना संगठन हो, लेकिन पुलिस अफसरों की मानें तो परदे के पीछे ये जो कर रहा है, वो कई मामलों में सिमी से कम नहीं है। इस बात के भी सबूत मिले हैं कि PFI के सदस्य पढ़े-लिखे युवकों को धार्मिक कट्टरता का पाठ पढ़ा रहे हैं। बड़े मुस्लिम कारोबारी PFI को चंदा दे रहे हैं।

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