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बकरीद पर छूट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार, कहा- प्रेशर ग्रुप के आगे झुक गई केरल सरकार

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार द्वारा बकरीद के मौके पर पाबंदियों में ढील दिये को लेकर कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे चिंताजनक स्थिति बताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने दबाव समूहों की वजह से कोरोना नियमों में छूट दे दी। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस तरह महामारी के खतरनाक हालात में रियायत देना ‘सॉरी स्टेट ऑफ अफेयर’ है। लोगों के जीने के अधिकार का अतिक्रमण नहीं किया सकता। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर छूट के कारण कोई अप्रिय घटना होती है, तो जनता इसे कोर्ट के संज्ञान में ला सकती है और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने केरल सरकार को सुप्रीम कोर्ट के कांवड़ यात्रा से जुड़े आदेश का पालन करने का निर्देश दिया।

क्या था मामला?

17 जुलाई को केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स में बकरीद के दौरान लॉकडाउन में ढील देने की घोषणा की थी इसके तहत कपड़ा, जूते, ज्वेलरी, फैंसी स्टोर, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि से जुड़ी तमाम दुकानें 18,19 और 20 जुलाई को सुबह 7 बजे से रात 8 बजे तक खोली जा सकेंगी। इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका यादर की गई जिसमें हालांकि कहा गया कि केरल में कोविड के सबसे ज्याद मामले दर्ज किए जा रहे हैं, फिर भी केरल सरकार ने अपनी मर्जी से राज्य में 3 दिन के लिए कोविड नियमों में ढिलाई दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए केरल सरकार को निर्देश दिया था कि वो 12 घंटे के भीतर अपना जवाब दाखिल करें।

केरल सरकार की दलील

पाबंदियों में ढील से जुड़ी याचिका पर जवाब दाखिल करते हुए केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कारोबारियों को मुश्किल से बचाने के लिए कोविड नियमों में सीमित छूट दी गई है। बकरीद के चलते कई कारोबारियों ने स्टॉक जमा कर लिया था। ऐसे में त्योहार के मौके पर बिक्री की अनुमति न मिलने से उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती है। सरकार ने कहा कि कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए बाजार में कोरोबारियों को सीमित छूट दी गई है। लेकिन कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

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