पुरानी पेंशन देने के लिये समिति का गठन, समिति तथ्यात्मक प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगी

भोपाल. मप्र में कर्मचारियों के दबाव और विधानसभा चुनाव को देखते हुए कर्मचारियों को पेंशन के लिये मप्र सरकार विचार कर रही है। इसी बीच मध्य प्रदेश सरकार ने गठित कर दी है। जो कर्मचारियों पुरानी पेंशन लागू करने पर विचार करेगी और तय करेगी कि कर्मचारियों को पेंशन का लाभ भी मिले और शासन को आर्थिक बोझ से बचा सके। केन्द्र सरकार के पेंशन निधि विनियामक विकास प्राधिकरण के परामर्श के अनुसार राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत कर्मचारियों को पेंशन देने के संबंध में विचार विमर्श शुरू कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग के उपसचिव दिलीप कुमार कापसे के हस्ताक्षर से 1 फरवरी 2023 को समिति का गठन किया गया है।
पेंशन समिति का गठन
मध्यप्रदेश के राज्य कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना को लागू करने की दिशा में कमेटी का गठन किया गया है। मध्यप्रदेश शासन के वित्त विभाग के सचिव को पदेन अध्यक्ष नियुक्त किया है जबकि कोष एवं लेखा के आयुक्त को सदस्य, संचालनालय नगरीय एवं विकास आयुक्त को सदस्य, मप्र लोक शिक्षण आयुक्त सदस्य, आदिवासी विकास संचालनालय के आयुक्त सदस्य, मप्र पेंशन भविष्य निधि एवं बीमा सदस्य सचिव, पंचायती राज संचालनालय के संचालक सदस्य, वित्त (नियम) उपसचिव सदस्य, सामान्य प्रशासन विभाग के उपसचिव सदस्य, एनएसडीएल के प्रतिनिधि सदस्य, के फीनटेक प्रतिनिधि सदस्य आदि को समिति में लिया गया है। समिति राष्ट्रीय प्रणाली से संबंधित विषयों पर समय-समय पर समीक्षा करते हुए तथ्यात्मक प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगी।
लास्ट सैलरी की आधी रकम कर्मचारी से लिया जाए योगदान
एक उपाय ये है कि ओल्ड पेंशन की तरह लास्ट सैलरी की आधी रकम तक पेंशन तो मिले लेकिन उसके लिए कर्मचारी से योगदान लिया जाए। इस तरह की स्कीम आंध्र प्रदेश में चलाई जा रही है। सरकार और पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी के बीच इस मुद्दे पर बातचीत हो चुकी है। इसे दिलचस्प तरीका माना जा रहा है लेकिन अमल में लाने से पहले कई पेचीदगियों को दूर करना है।
मौजूदा एनपीएस में तय कर दी जाए न्यूनतम पेंशन
मौजूदा एनपीएस में ही न्यूनतम पेंशन तय कर दी जाए। एनपीएस के प्रति शिकायत यह है कि इसमें कर्मचारी का योगदान तय है लेकिन रिटर्न तय नहीं है। इस पर काम लगभग पूरा हो चुका है लेकिन बोर्ड की मंजूरी बाकी है। हालांकि संकेत मिल रहे है कि इसमें न्यूनतम रिटर्न 4 से 5 प्रतिशत हो सकता है। जिसे बेहद कम समझा जाएगा। गारंटी के कारण लागत बढ़ जाएगी। वैसे बाजार ने बेहतर रिटर्न दिया तो न्यूनतम रिटर्न से 2-3 प्रतिशत ज्यादा तक पेंशन मिल सकती है। इसके अलावा मौजूदा एनपीएस में मच्योरिटी की 60 प्रतिशत रकम कर्मचारी के हाथ में चली जाती है। अगर ये पैसा भी पेंशन में लग जाए तो पेंशन की रकम बढ़ जाएगी।
अटल योजना की तरह सबको न्यूनतम पेंशन की गारंटी
अटल पेंशन योजना की तरह सबाके न्यूनतम पेंशन की गारंटी दी जाए। पीएफआरडीए फिलहाल ये योजना चला रही है जिसमें योगदान के आधार पर 1000 रुपए से लेकर 5000 रुपए तक की पेंशन तय है। पीएफआरडीए अटल पेंशन योजना का दायरा सभी के लिए बढ़ाने और 5000 रुपए की लिमिट खत्म करने के लिए तैयार हो सकती है। बशर्ते गारंटी में किसी वित्तीय कमी की स्थिति में सरकार मदद का जिम्मा ले। अटल पेंशन योजना के पीछे सरकार का हाथ है। तीनों उपायों पर विचार करने का जिम्मा पीएफआरडीए के पास ही है।

