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न्यू पेंशन-नेताओं के लिये मोटी मोटी पेंशन और कर्मचारियों के 700 रूपये पेंशन होगा आन्दोलन

भोपाल. कैलाश प्रसाद मालवीय, इच्छावर स्कूल के प्राथमिक शिक्षक थे। उन्हें हर माह 56 हजार रूपये वेतन मिलता था। 31 जुलाई 2022 के बाद वह सेवानिवृत्तत हो गये। अब उन्हें पेंशन के नाम 700 रूपये मिल रहे हैं। कैलाश की तरह भोपाल में 17 हजार पूरे प्रदेश में ऐसे 5 लाख कर्मचारी है। जिन्हें इतनी पेंशन से गुजर बसर करनी पड़ रही है। इतनी कम पेंशन की सिर्फ एक वजह न्यू पेंशन स्कीम है। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने बताया कि 1 जनवरी 2005 के बाद से सरकारी नौकरी में आये कर्मचारी एवं इसके बाद नये कैडर में शामिल हुए शिक्षक न्यू पेंशन स्कीम के दायरेे में आ रहे हैं। स्कीम में तय प्रावधानों के तहत उनके वेतन से अंशदान की कटौती होती है।

2005 के बाद सरकारी नौकरी में आए और नए कैडर में शामिल हुए कर्मचारी हो रहे प्रभावित

रामस्वरूप देवलिया
रामस्वरूप देवलिया

रामस्वरूप देवलिया सीहोर में प्राथमिक शिक्षक थे। नियुक्ति 31 अक्टूबर 1998 को हुई थी। वेतन 45 हजार प्रति माह था। 31 अक्टूबर 2021 को रिटायर हुए और उन्हें सिर्फ 1836 रु. पेंशन मिल रही है।

अमर सिंह सोलंकी
अमर सिंह सोलंकी

अमर सिंह सोलंकी सीहोर में प्राथमिक शिक्षक थे। 1 मई 1998 को नियुक्ति हुई थी। वेतन 40 हजार प्रति माह था। 31 मई 2022 को रिटायर होने के बाद अब उन्हें सिर्फ 1700 रुपए पेंशन मिल रही हंै।

रामविलास नगवे
रामविलास नगवे

रामविलास नगवे भोपाल के लांबाखेड़ा प्राइमरी स्कूल में टीचर थे। उन्हें ₹35 हजार प्रति माह सैलरी मिल रही थी। वे 31 जनवरी 2020 को रिटायर हुए थे। अब उन्हें सिर्फ 687.42 रूपए पेंशन मिल रही है।

गणेश राम मोदी
गणेश राम मोदी

गणेश राम मोदी रतलाम में प्राथमिक शिक्षक थे। उनकी नियुक्ति 15 अप्रैल 1998 में हुई थी। उन्हें ₹60000 महीने सैलरी मिल रही थी। 30 अप्रैल 2022 को रिटायर हुए तो सिर्फ ₹1959 पेंशन मिल रही है।

कम पेंशन मिलने का कारण
शैक्षणिक मामलों के जानकार रमाकांत पांडे के अनुसार 1998 या उसके आसपास के वर्षो में यह शिक्षक, शिक्षाकर्मी थे। 2007 में यह अध्यापक बने। तब इनकी सैलरी भी कम थी। 2018 में इन्हें राज्य स्कूल शिक्षक सेवा नाम के कैडर में शामिल किया गया और इसके बाद 7वां वेतनमान लागू हुआ तो सैलरी दोगुनी हो गयी। नये कैडर में आने के बाद इन पर 2011 से न्यू पेंशन स्कीम लागू की गयी। 2011 से नये कैडर बनने यानी 2018 तक जब इनकी सैलरी बहुत कम थी तो वेतन से अंशदान भी दस फीसदी ही काटा जिाता था, उसी के अनुसार से इनकी पेंशन बनी है।
10 वर्षो में 500 आंदोलन
पेंशन स्कीम के विरोध में और पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने की मांग को लेकर कर्मचारी संघ और शिक्षकों के संगठन पिछले 10 वर्षो में 500 से ज्यादा छोटे बड़े आन्दोलन कर चुके हैं। शिक्षक परसराम कपाडि़या सड़क पर लेट-लेटकर सीहोर से भोपाल तक पहुंचे थे। इस वर्ष भी इस मामले में 51 आन्दोलन और किये जायेंगे।

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