नये साल में राज्य सरकार का मेगा प्लान में 15 कर्मचारियों को आयुष्मान का तोहफा, पेंशन नियम में बदलाव, 5डे वीक खत्म, भर्ती के नियमों में बदलाव
भोपाल. मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन सरकार प्रशासनिक कसावट के लिये नये साल में 5 बड़े बदलाव करने जा रही है। 5 डे वीक समाप्त करने जा रही है इसके साथ ही छुट्टियों में कटौती के साथ क्षेत्रवार अवकाश प्रणाली को लागू किया जायेगा। यूपी, हरियाणा और राजस्थान सरकार की तरह कर्मचारियों को उपचार के लिये आयुष्मान जैसी योजना लाने की तैयारी में है। पेंशन और केन्द्रीय कर्मचारियों के समान मिलेगी और इतना ही नहीं, तीसरी संतान होने पर नौकरी पर रोक को हटाने पर विचार कर रही है। विभागों में खाली पड़ेपदों को भरने के लिये परीक्षा सिस्टम में बड़ा बदलाव किया गया है।
1-मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना में कैश लैसे उपचार क्या है मौजूदा सिस्टम
वर्तमान में राज्य के कर्मचारियों और पेंशनर्स को उपचार का खर्च पहले स्वयं को उठाना पड़ता है। जिसका भुगतान सरकार बाद में केन्द्रीय स्वास्थ्य योजना(सीजीएचएस) की दरों के अनुसार करती है। इस प्रणाली में अक्सर उपचार का पूरा खर्च कवर नहीं होता है। उदाहरण के लिये लीवर ट्रांसप्लांट पर करीब 20 लाख रूपये का खर्च आता है। सरकार केवल 4 लाख रूपये प्रतिपूर्ति करती है। वह भी कर्मचारी द्वारा बिल जमा करने के बाद। प्रस्तावित योजना के अनुसार मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत एमपी के 18 लाख कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके परिवारों को कैश लैस उपचार की सुविधा मिलेगी। इस मॉडल में कर्मचारियों के वेतन से 3 से 12 हजार रूपये तक का वार्षिक अंशदान लिया जायेगा। जबकि शेष राशि सरकार वहन करेगी। अंशदान की अंतिम राशि अभी तय होनी है। इस योजना में साम्राज्य बीमारियों के लिये 5 लाख और गंभीर बीमारियों के लिये 10 लाख रूपये तक के कैश लेस उपचार का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त कर्मचारी उपचार के बाद अपने विभाग से चिकित्सा रिफंड के लिये भी आवेदन कर सकेगा।
2-छुट्टियों में कटौती और क्षेत्रवार अवकाश प्रणाली
सरकार नये वर्ष से 5 डे वीक व्यवस्था खत्म करने और छुट्टियों के नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है। इसके लिये गठित एक समिति ‘‘क्षेत्रवार अवकाश’’ लागू करने की सिफारिश कर सकती है। इस प्रणाली के तहत पूरे राज्य में एक समान अवकाश न होकर, जिलों को स्थानीय त्यौहारों और परंपराओं के मुताबिक छुट्टियां घोषित करने का अधिकार मिलेगा। समिति एच्छिक अवकाशों का भी पुनः निर्धारण करेगी। वर्तमान में कर्मचारियों को 53 चिन्हित अवकाशों में से 3 ऐच्छिक छुट्टियां मिलती है। समिति इस बात का भी मूल्यांकन कर रही है कि कोरोना काल में शुरू की गयी 5डे वीक व्यवस्था का जारी रखा जाये या नहीं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल के 365 दिनों में से 197 दिन छुट्टियों में बीतते हैं। जिससे कर्मचारी औसतन केवल 168 दिन हीर काम करते हैं। इस कारण से यह बदलाव प्रस्तावित है।
3-केंद्र के समान पेंशन नियम, बेटियों को मिलेगा फायदा
मध्य प्रदेश सरकार पेंशन नियमों को केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक बना रही है। नए नियम के तहत, 25 साल से ज्यादा उम्र की अविवाहित, विधवा या परित्यक्ता बेटी भी परिवार पेंशन की पात्र होगी। वर्तमान में यह फायदा केवल 25 वर्ष तक की अविवाहित बेटी को ही मिलता है। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार द्वारा 2011 में लागू की गई व्यवस्था पर आधारित है।इसे परीक्षण के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा गया है। कर्मचारी आयोग भी पहले इसकी अनुशंसा कर चुका है। सेवानिवृत्त आईएएस जीपी सिंघल की अध्यक्षता वाले आयोग की रिपोर्ट पर वित्त विभाग सैद्धांतिक सहमति दे चुका है और अब यह प्रस्ताव अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया में है।
4. सरकारी नौकरी में दो बच्चों की शर्त खत्म होगी
सरकार लगभग 24 साल पुराने उस नियम को खत्म करने की तैयारी में है, जिसके तहत दो से अधिक संतान वाले व्यक्ति सरकारी नौकरी के लिए अपात्र माने जाते हैं। इस संशोधन के बाद तीन संतान वाले उम्मीदवार भी नियुक्ति के पात्र होंगे। 26 जनवरी 2001 से लागू इस नियम में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट में पेश किया जाएगा। मध्य प्रदेश से पहले छत्तीसगढ़ और राजस्थान भी यह शर्त हटा चुके हैं।शर्त समाप्त होने के बाद तीसरी संतान से जुड़े जितने भी केस न्यायालयों या विभागीय जांचों में लंबित हैं, उन्हें स्वतः समाप्त मान लिया जाएगा। इन पर अब कोई कार्रवाई नहीं होगी। हालांकि, वर्ष 2001 के बाद जिन शासकीय सेवकों पर तीसरी संतान के आधार पर कार्रवाई हो चुकी है या वे नौकरी से बाहर किए जा चुके हैं, उन मामलों पर कोई सुनवाई नहीं होगी। इस फैसले से मेडिकल एजुकेशन, हेल्थ, स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों को राहत मिलेगी।
5. भर्ती प्रक्रिया में बड़ा सुधार, अब होगी संयुक्त परीक्षा
भर्ती प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए सरकार MPPSC और ESB के लिए ‘संयुक्त भर्ती परीक्षा नियम-2025’ लाई है। इसके तहत समान योग्यता वाले विभिन्न पदों के लिए एक ही संयुक्त परीक्षा आयोजित की जाएगी। इससे उम्मीदवारों को अलग-अलग परीक्षाओं के लिए बार-बार आवेदन नहीं करना पड़ेगा, जिससे उनके समय और धन दोनों की बचत होगी।एक कैलेंडर ईयर में एमपीपीएससी सिर्फ 5 और कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) सिर्फ एक बड़ी परीक्षा कराएगा। शासन स्तर पर ड्राफ्ट लगभग तैयार हो गया है। दिवाली के बाद 23-24 अक्टूबर को मुख्य सचिव स्तर की वरिष्ठ सचिव समिति के सामने इसका प्रेजेंटेशन हो सकता है। फिर ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा।

