ग्वालियर में टारगेट व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोलेगा टिकट चेकिंग स्टाफ
ग्वालियर. स्टेशन से गुजर रही थ्रू ट्रेन थिरुकुरल एक्सप्रेस में चढ़ते समय असंतुलित होकर ट्रेन में चपेट में आकर पैर गंवाने वाले सीटीआइ राजेश द्विवेदी की हालत अब स्थिर बनी हुई है। इस घटना के बाद टिकट चेकिंग स्टाफ में भी रोष है, क्योंकि हर महीने छह लाख रुपए की राजस्व वसूली के टारगेट के कारण स्टाफ दबाव में काम कर रहा है।
सोमवार को टिकट चेकिंग स्टाफ ने भी गोपनीय बैठक में निर्णय लिया कि अब टारगेट के लिए जान जोखिम में नहीं डाली जाएगी। यदि रेल प्रशासन द्वारा जवाब मांगा जाता है, तो काम बंद भी करने पर विचार किया जाएगा। दरअसल, झांसी मंडल द्वारा ओपन डिटेल ड्यूटी में तैनात टिकट चेकिंग स्टाफ को हर माह छह लाख रुपये की वसूली का टारगेट दिया जाता है, जो काफी मुश्किल हो जाता है। इस टारगेट को पूरा करने के लिए स्टाफ भी ट्रेनों में भागदौड़ करके जुर्माने की कार्रवाई करता है।
सीटीआइ के साथ हुई घटना को इसी दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में टिकट चेकिंग स्टाफ लामबंद होने की तैयारी कर रहा है और निर्णय लिया गया है कि यदि वसूली का दबाव बनाया जाता है, तो स्टाफ काम बंद कर देगा। रेल कर्मचारी यूनियन एनसीआरईएस के मंडल सचिव भानुप्रताप सिंह चंदेल ने इसका समर्थन करते हुए कहा है कि जीवन से बड़ा कोई टारगेट नहीं है। इस मामले में यूनियन द्वारा रेल प्रशासन से चर्चा कर कर्मचारियों के हित में रास्ता निकाला जाएगा।

