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खरगोन में दंगों की कहानी SP की जुबानी: एक तलवारबाज हिंदुओं की तरफ दौड़ा, मैंने पकड़ा तो किसी ने गोली मार दी, उसे कोई कवर दे रहा था

भोपाल. रामनवमी का जुलूस रविवार शाम करीब सवा पांच बजे तालाब चौक पहुंचा था। यहां एक पुलिस चौकी है। इसके ठीक सामने मस्जिद है। रामनवमी के जुलूस में शामिल झांकियां इस चौराहे पर कतार में खड़ी होती हैं। शाम होते-होते लगभग सभी झांकियां आ गईं। डीजे बज रहा था। इस दौरान यहां करीब 12 से 15 हजार लोग थे।

मुख्य झांकी के नहीं पहुंचने से जुलूस शुरू होने में देर हो रही थी। मैंने समिति के पदाधिकारियों से बात करके झांकियों को धीरे-धीरे आगे बढ़ाना शुरू कर दिया, लेकिन इस बीच मस्जिद में अजान (नमाज) का समय हो गया। पीछे से बिना किसी वजह के कुछ लड़कों ने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। हमने टियर गैस चलाकर 15 मिनट में स्थिति को नियंत्रण में ले लिया। इसके बाद जुलूस को धीरे-धीरे फिर आगे बढ़ाया, लेकिन भीड़ ज्यादा थी। हालांकि, तालाब चौक खाली हो गया था। इस बीच मुसलमानों के लोग इकट्‌ठा हो गए। जगह-जगह आगजनी शुरू हो गई। यह पूरा इलाका घनी बस्ती से घिरा है। कुछ मोहल्ले में हिंदू-मुस्लिम एक साथ रहते हैं। कुछ बस्तियां मुस्लिम बहुल हैं। कुछ बस्तियां तो इतनी तंग हैं कि चार पहिया वाहन अंदर नहीं जा सकता। इसके बावजूद पुलिस वाले दौड़-दौड़कर गलियों के अंदर गए। जिन घरों में आग लगी थी, वहां से लोगों को सुरक्षित निकाला गया।

मैं तालाब चौक इलाके में ही था। इस बीच खबर आई कि संजय नगर में दोनों समुदाय आमने-सामने हो गए हैं, जबकि पुलिस बल बहुत कम है। यह सुनते ही मैं अपने गनमैन, ड्राइवर और तीन-चार आरक्षकों के साथ संजय नगर पहुंच गया। मैंने देखा कि दोनों पक्ष आमने-सामने थे। स्थिति ज्यादा तनावपूर्ण दिख रही थी। हमने दोनों तरफ की भीड़ को हटाने के लिए टियर गैस के कई गोले फेंके। भीड़ थोड़ा पीछे हट गई थी। हमने दोनों पक्षों को समझाया, लेकिन उस समय तक इस इलाके में भी आगजनी ज्यादा हो चुकी है। फायर ब्रिगेड की गाड़ी को भीड़ ने क्षतिग्रस्त कर दिया था। डर के कारण फायर ब्रिगेड का क्लीनर मौके से भाग गया था। आग को काबू करने के लिए हमने फायर ब्रिगेड को आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन सामने भीड़ थी।

शाम सवा सात बज चुके थे अंधेरा हो गया था। इस दौरान एक व्यक्ति हाथ में तलवार लेकर हिंदुओं की तरफ दौड़ गया। बीच में हम 12-15 पुलिस वाले थे। वह पुलिस को बायपास कर जाने लगा तो उसे पकड़ लिया गया, लेकिन वह छूटकर फिर भागने लगा। तब मैं उसे पकड़ने भागा। शायद उसको कोई कवर दे रहा था, उसने मुझ पर फायर कर दिया। मेरे पैर में गोली लगी। पहले तो मुझे लगा कि पत्थर लगा है। चलने में दिक्कत आई, तो मैं किनारे खड़ा हो गया।ब्लीडिंग ज्यादा हो गई थी। पैर खून से लथपथ हो गया था। मेरा गनमैन समझ गया कि गोली लगी है। मैंने चिल्लाना शुरू कर दिया था कि गोली लगी है। चिल्लाना इसलिए जरूरी था, क्योंकि हर गली में भीड़ जमा थी। अनुमान से एक तरफ 300 से 400 लोग और दूसरी तरफ 400 से 600 लोग थे, जो तंग गलियों में भरे पड़े थे। इस बीच फोर्स आ गई। मेरे गनमैन को पत्थर लगे थे। उसके सिर से खून बह रहा था। इसके बावजूद वह मुझे गाड़ी में बैठाकर अस्पताल ले गया।

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