कृष्णराव दीक्षित को कांग्रेस ने दिखाया बाहर का रास्ता, नोटिस का जवाब नही ंदेने पर की गयी कार्यवाही
ग्वालियर. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और ग्वालियर नगरनिगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष कृष्णराव दीक्षित ने अपनी ही पार्टी की विचारधारा पर सवाल खड़ा करनते हुए कम्युनिस्ट और फांसीवादी विचाराधारा की पार्टी होने का आरोप लगाया था। जिसके बाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष देवेन्द्र शर्मा ने उन्हें नोटिस जारी कर पार्टी के खिलाफ बयानबाजी करने पर जवाब तलब किया था। लेकिन कृष्णराव दीक्षति ने उनके नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया जिसके बाद उन्हें कांग्रेस पार्टी से निष्कासित कर बाहर का रास्ता दिखाया है।
क्या है मामला
कृष्ण राव दीक्षित कांग्रेस पार्टी के पुराने नेता हैं उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री और ग्वालियर के महाराज स्वर्गीय माधवराव सिंधिया से प्रभावित होकर कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की थी। उन्हें कांग्रेस पार्टी का सच्चा सिपाही माना जाता था। लेकिन पिछले कुछ दिनों से वह पार्टी से साइड लाइन चल रहे थे। इसलिए उन्होंने भाजपा के मंच भी साझा करना शुरू कर दिए थे। इसकी शिकायतें भी कांग्रेस को मिल रही थी। ऐसे में एक अखबार को दिए हुए अपने साक्षात्कार में कांग्रेस पार्टी की विचारधारा को सवालों के घेरे में लिया था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस अपनी विचारधारा से बदल गई है। अब कम्युनिस्ट और फासीवादी विचारधारा वाली पार्टी बन गई है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के कम होते जनाधार को भी इससे जोड़ते हुए बताया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इसीलिए अपना जनाधार खो रही है। उन्होंने दिल्ली इलेक्शन का हवाला देते हुए कांग्रेस के आला नेतृत्व पर भी प्रश्न चिन्ह लगाया।
नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर हुई कार्यवाही
मामले में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष देवेन्द्र शर्मा ने बताया कि 3 दिन पूर्व पार्टी के खिलाफ बयानबाजी करने पर नोटिसा जारी किया गया था। लेकिन उनके नोटिस जारी किया गया था। लेकिन उनके नोटिस का कोई जवाब नहीं मिलने पर इसके बाद उनके विरूद्ध पार्टी से निष्कासन का निर्णय लिया गया। उन्हें पार्टी से बेदखल किया गया है और इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि कृष्णराव दीक्षित पिछले कई दिनों से भाजपा के संपर्क में है। उन्होंने कई बार भाजपा के मंच साझा किया है। लेकिन फिर भी पार्टी ने उनके खिलाफ कोई कार्यवाही न हीं की गयी। उन्होंने अब पार्टी की विचारधारा पर ही सवाल खड़े किये हैं। इसलिये उन पर यह कार्यवाही की गयी है।
कृष्णराव दीक्षित पूर्व मंत्री रामनिवास रावत के भी नजदीकी माने जाते है। रामनिवास रावत के कांग्रेस पार्टी छोड़ने के बाद से ही कृष्णराव दीक्षित कांग्रेस पार्टी से दूरियां बनाकर चल रहे थे। अंत में उन्होंने पार्टी के खिलाफ बयानबाजी करके कांग्रेस की किरकिरी करा दी है। इसके बाद कांग्रेस को मजबूर होकर उनके खिलाफ कार्यवाही करना पड़ी।

