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आरोग्यधाम का अस्पताल प्रस्तावित है, रायपुर ग्राम का परंपरागत रास्ता खुला

ग्वालियर – राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे बसे जिले के ग्राम रायपुर के निवासी खेतों से होकर गुजर रहे एक आम रास्ते पर हुए अतिक्रमण से परेशान थे। खेतों की तरफ आवागमन में उन्हें खासी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था। इसके लिये ग्रामीणजनों ने यह अभियान शुरू करने के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार जताया है। कराया। इस जमीन पर आरोग्यधाम का अस्पताल प्रस्तावित है। इसी तरह जिले के अन्य एसडीएम व राजस्व अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में राजस्व संबंधी समस्याओं के निराकरण के लिये पहुँचे। एसडीएम लश्कर नरेन्द्र बाबू ने राजस्व अधिकारियों की टीम के साथ गोले का मंदिर क्षेत्र में पहुँचकर जमीन का सीमांकन किया जाए।
क्या है पूरा मामला
गोले के मंदिर के सामने मार्क और एस्कॉर्ट हॉस्पीटल के लिये दी गयी जमीन पर अस्पताल नहीं जाने के बाद अब यह मौका आरोग्यधाम सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर बनाने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। इसका निर्माण पिछले 38 सालों से अस्पताल के लिये आरक्षित जमीन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंद्ध संस्था तराणेकर स्मृति सेवा न्यास करवायेगी। यह अस्पताल का विस्तार होगा। आरोग्यधाम प्रबंधन ने कुछ समय पूर्व राज्य सरकार को इसका प्रस्ताव भेजा था। जिसे प्रदेश की मोहन सरकार ने मंजूरी दे दी है। अब आरोग्यधाम प्रबंधन की विभागीय प्रक्रिया पूरी करनी है। प्रारंभिक तौर पर यहां 200 बिस्तर का अस्पताल तैया होगा और बाद में धीरे-धीरे इसकी बेड क्षमता बढ़ाई जायेगी।
संघ ने आरोग्यधाम हॉस्पिटल की शुरूआत तराणेकर स्मृति सेवा न्यास के तहत 2011 में एजी ऑफिस पुल के पास की थी। यहां अभी 200 बिस्तर का अस्पताल संचालित हो रहा है। साल 2025 मे ंसंघ का शताब्दी वर्ष होने की वजह संघ इस वर्ष में सेवा कार्यो के विस्तार पर जोर दे रहा है। ग्वालियर कलेक्टर रूचिका चौहान ने बताया है कि आरोग्यधाम के प्रस्ताव को शासन से स्वीकृति मिल चुकी है।
तीन राज्यों का होगा फायदा
इस अस्पताल के बनने के पर सिर्फ ग्वालियर और अंचल के दूसरे जिलों को ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई जिलों के लोगों को भी बेहतर उपचार की सुविधा मिल सकेगी।
प्रमुखता से हो रहा है परंपरागत रास्ते खुलवाने का काम
कलेक्टर रुचिका चौहान ने निर्देश दिए हैं कि इस बार के राजस्व महाअभियान के दौरान परंपरागत रास्तों के विवादों का निराकरण प्रमुखता से किया जाए। सभी राजस्व अधिकारी धारा-131 के तहत प्रकरण दर्ज कर राजस्व संबंधी विवादों का निराकरण करें। साथ ही जल निकासी इत्यादि से संबंधित विवादों का भी अभियान के दौरान समाधान करें।

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