सरकारी व प्रायवेट अस्पतालों में सुरक्षा उपायों के साथ कोई समझौता न हो – संभाग आयुक्त
अस्पतालों में नियमित अंतराल से आपदा प्रबंधन पर मॉकड्रिल कराने पर भी दिया जोर
ग्वालियर – छोटे-बड़े सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ प्राइवेट नर्सिंग होम व अस्पतालों में भी सुरक्षा उपायों के साथ कोई समझौता न हो। सभी अस्पताल “फायर सेफ्टी प्रमाण-पत्र” और विद्युत सुरक्षा प्रमाण-पत्र प्राप्त करें। साथ ही सभी अस्पतालों में सर्वोच्च न्यायालय एवं केन्द्र व राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत “स्वास्थ्य संस्थान सुरक्षा समिति और हिंसा रोकथाम समिति” का गठन कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएँ। इस आशय के निर्देश संभाग आयुक्त मनोज खत्री ने अस्पतालों की सुरक्षा को लेकर बुलाई गई बैठक में संबंधित अधिकारियों को दिए। उन्होंने अस्पतालों में फायर ऑडिट और आपदा प्रबंधन को लेकर नियमित मॉकड्रिल करने पर विशेष जोर दिया।
शासन के प्रावधानों के तहत 50 बिस्तर से अधिक क्षमता वाले सभी सरकारी और गैर सरकारी अस्पताल एक माह के भीतर फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम कर लें। नियमित अंतराल पर फायर सेफ्टी मॉकड्रिल आयोजित करने पर जोर देते हुए संभाग आयुक्त ने कहा कि विशेषकर आईसीयू और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में ऐसी व्यवस्था बनाएँ, जिससे आपात स्थिति होने पर तत्काल रेस्क्यू किया जा सके। पुलिस महानिरीक्षक अरविंद सक्सेना ने सभी सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर प्रोटेक्शन एक्ट के प्रावधानों को प्रदर्शित कराने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि पुलिस इस प्रावधान को लेकर पूरी तरह सजग है। पुलिस द्वारा अस्पतालों में लगातार गश्त किया जाए।
मोबाइल एप पर अपलोड होगी सुरक्षा की जानकारी
कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने कहा सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों की फायर एनओसी व ऑडिट सहित सभी सुरक्षा उपायों की जानकारी अपलोड कराने के लिये जल्द ही एक मोबाइल एप तैयार कराया जायेगा। इस एप पर नियमित रूप से जानकारी अपलोड करनी होगी, जिससे इसकी नियमित रूप से मॉनीटरिंग होती रहे।
ठीक से काम न करने वाली कंपनी को ब्लैक लिस्ट कराएँ
जयारोग्य चिकित्सालय सहित अन्य सरकारी चिकित्सालयों में सुरक्षा व्यवस्था व साफ-सफाई का काम जिस कंपनी को मिला है वह ठीक से काम करे। यदि इसमें ढ़िलाई सामने आए तो कंपनी पर पैनल्टी लगाने साथ-साथ शासन को पत्र लिखकर उसे ब्लैक लिस्ट भी कराएँ।
सरकारी अस्पतालों में मरीजों को भटकना न पड़े
जयारोग्य चिकित्सालय प्रबंधन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को इलाज के लिये भटकना न पड़े। हैल्पडेस्क सक्रिय रहें। साथ ही चिकित्सक सहित स्टाफ का व्यवहार उनके प्रति संवेदनशील हो।

