भारत में बोले चीन के राजदूत-ताइवान सदैव से चीन का है… एक होने से हमें कोई नहीं रोक सकता
नई दिल्ली/बीजिंग. भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने ताइवान को लेकर एक बार फिर चीन का सख्त रूख दोहराया है। उन्होंने कहा है कि ताइवान प्राचीनकाल से चीन का हिस्सा रहा है।इस पर कोई विवाद नहीं है। उनके अनुसार ताइवान से जुड़े इतिहास और कानूनी तथ्य पूरी तरह से स्पष्ट है।
चीन के राजदूत भारत में बोले
चीन के राजदूत बोले कि अक्टूबर 1949 में पीपुल्स रि पब्लिक ऑफ चाइन की स्थापना हुई थी। जिसने री पब्लिक ऑफ चाइना की सरकार की जगह लेकर पूरे चीन का एक मात्र वैध प्रतिनिधि बनने का अधिकार हासिल किया। सरकार बदलने के बावजूद अंर्तराष्ट्रीय कानून के तहत चीन की स्थिति नहीं बदली। पीआरसी सरकार को ताइवान सहित पूरे चीन पर संप्रभुता प्राप्त है।
चीन का एक होना तय
चीन के राजदूत ने यह भी दोहराया है कि ताइवान कभी भी एक स्वतंत्र संप्रभु देश नहीं रहा है। न अतीत में, न वर्तमान में और न ही भविष्य में। उन्होंने कहा है कि ताइवान में सत्तारूढ डीपीपी प्रशासन चाहे जो भी बयान दें। कदम उइाये, चीन का दोबारा एकीकरण होना तय है। इसे कोई रोक नहीं सकता है।
‘चीन न कभी बंटा था, न कभी बंटेगा’
उन्होंने कहा कि गृहयुद्ध और बाहरी ताकतों के हस्तक्षेप के कारण ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों किनारों के बीच राजनीतिक टकराव बना रहा, लेकिन इससे चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर कोई असर नहीं पड़ा। शू फेइहोंग ने साफ कहा कि चीन का क्षेत्र कभी विभाजित नहीं हुआ है और न ही कभी होगा। ताइवान चीन का अभिन्न हिस्सा रहा है और रहेगा।

