भारतीय नौसेना नया हंटर किलर, पल भर में दुश्मन कहीं भी हो पलभर में साफ
नई दिल्ली. अब चाहे अरब सागर हो या फिर बंगाल की खाड़ी या हिन्द महासागर किसी भी ओर से दुश्मन देश की ओर नजर उठाकर नहीं देख पायेगा। बहुत बढ़ी वजह है कि भारतीय नौसेना को उसका दूसरा पीएम15 स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर मिल गया है। इस विध्वंसक युद्धपोत में भारत की सबसे ताकतवर मिसाइलें ब्रम्होस और बराक मिसाइल से लैस है। यह युद्धपोत दुश्मन का जहाज देखते ही अपने डेक से एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल लांच कर सकता है। इस जंगी जहा के नौसेना में शामिल होने से क्या लाभ होगा। क्या इससे हिन्द महासागर में भारत की धमक बढ़ जायेगी।

आईएनएस मोरमुगाओ को मझगांव डॉक् शिपबिल्डर्स ने तैयार किया है। इससे पहले भारतीय नौसेना को इस क्लास का आईएनएस विशाखापट्टनम मिला था। यह दोनों जंगी जहा सिर्फ भारतीय नौसेना की ताकत ही नहीं बढ़ायेगा बल्कि आत्म निर्भर भारत को लेकर चलाये जा रहे मुहिम को भी आगे ले जायेगा।

आईएनएस मोरमुगाओ स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर को बनाने की शुरूआत 4 जून 2015 में हुई थी। 24 नवम्बर 2022 में इसे भारतीय नौसेना को सौंपा गया है। यह 7400 टन का जंगी जहाज है। 535 फीट लम्बे इस युद्धपोत्ज्ञ को ट्विवन जोर्या M36E गैस टर्बाइन प्लांट, बर्जेन केवीएम डीजल इंजन ताकत देते हैं।

आईएनएस मोरमुगाओ की अधिकतम स्पीड 56 किमी प्रतिघंटा है। अगर यह 26 किमी प्रतिघंट की स्पीड से चलता है तो इसकी रेंज 7400 किमी है। इस जंगी जहाज पर 300 नौ सैनिक रह सकते हैं। जिसमें से 50 अधिकारी और 250 सेलर्स शामिल है। इसमें डीआरडीओ द्वारा बनाया गया इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर शक्ति ईडब्ल्यूसुइट और कवच चैफ सिस्टम लगा हुआ है।

मोरमुगाओ गाइडेड मिसाइल विघ्वंसक में 32 एंटी एयर बराक 8 मिसाइलें तैनात हैं। इनकी रेंज 100किमी है। इसके अलावा 16 एंटीशिप ब्रम्होस मिसाइलें तैनात है। दोनों ही मिसाइलें वर्टिकल लांच सिस्टम के तहत छोड़ी जायेगी। यानी इन दोनों मिसाइलों से लैस होने के बाद यह युद्धपोत समुद्री शैतान की तरह दुश्मन के जहाजों और विमानों पर मौत बनकर टूट पड़ेगा।

आईएनएस मोरमुगाओ (INS Mormugao) पर दो वेस्टलैंड सी किंग या HAL ध्रुव हेलिकॉप्टर ले जाए जा सकते हैं. इस युद्धपोत में स्टेट ऑफ द आर्ट सेंसर लगे हैं, जो दुश्मन के हथियारों का आसानी से पता कर सकते हैं. ये सेंसर्स ऐसे डेक में लगाए गए हैं, जिन्हें दुश्मन देख नहीं सकता. इसमें बैटल डैमेज कंट्रोल सिस्टम्स लगाए गए हैं. यानी युद्ध के दौरान अगर जहाज के किसी हिस्से में नुकसान हो तो पूरा युद्धपोत काम करने बंद न करे.

