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फतेहपुर मस्जिद विवाद -फिरोजाबाद, शिकोहाबाद और फतेहपुर में शहर-शहर में हैं विवाद की लहर,

फतेहपुर. यूपी में 2047 के विजन को लेकर विवाद विशेष सत्र बुलाया गया है तो दूसरी ओर राज्य के ही 6-7 जिलों की पुलिस फतेहपुर में लगभग 400 साल पुरान एक मकबरे की सुरक्षा में तैनात करनी पड़ी है। वजह, यूपी की राजनीति में विकास की चर्चा कम और हिन्दू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद, मकबरा-धाम जैसी चीजों और विवादों की चर्चा अधिक होती है। इन दिनों भी यूपी के फतेहपुर में एक मकबरे का विवाद ऐसा बढ़ा है। कि जिला प्रशासन की सांसें फूली हुई है।
छरअसल, यूपी में शहर-शहर मंदिर खोजने की लहर चल रही है। फिरोजाबाद के सिकंदरपुर में मजार हटाने के लिये चासीसा हो रही है। शिकोहाबाद के मलखानापुर में कथित मजार के अन्दर मूर्ति रख दी गयी। फतेहपुर मे ंतो ऐसा उपद्रव हुआ है कि यूपी पुलिस के हाथ-पांव फूल गये थे। फतेहपुर के सैकड़ों साल पुराने मकबरा-ए-संगी तक पहुंच रोकने के लिये पुलिस ने जबरदस्त सुरक्षा कर रखी है। बांस-बल्लियों से 3 लेयर की बेरिकेडिंग की गयी है। गलियां भी बंद कर दी गयी है। मकबरे के बाहर चबूतरे पर पुलिसकर्मी तैनात है।
दूसरी बेरिकेडिंग में पीएसी के जवान तैनात है। ड्रोन, सीसीटीवी से निगरानी चल रही है। बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, कौशांबी, प्रतापगढ़ से पुलिस टीमें बुलाई गयी है। मौके पर एडीजी प्रयागराज जोन संजीव गुप्ता और आईजी रेंज अजय मिश्रा तक पहुंच चुके हैं। अब कम से कम जन्माष्टमी तक ऐसी ऐसी ही व्यवस्था बनी रहने की अनुमान है।
मकबरा-मंदिर का झगड़ा क्या है?
फतेहपुर के आबूनगर के रेडइया इलाके में औरंगजेब के फौजदार अब्दुल समद और उसके बेटे अबु मोहम्मद की कब्र पर मकबरा बना है. इतिहास कहता है कि औरंगजेब ने अपने शासन के 48वें साल में अब्दुल समद को अपना चकलेदार (टैक्स वसूलने वाला) बनाया था. इसके बाद 1699 में समद की मौत हो गई और उसके बेटे अबु मोहम्मद ने साल 1710 में मकबरा-ए-संगी बनाया. मकबरा पूरी तरह पत्थरों का है. मकबरे में अब्दुल समद और अबू खान की कब्रें भी हैं.लेकिन हिंदू पक्ष का दावा है कि यहां पहले भगवान शंकर और श्रीकृष्ण के ठाकुरजी मंदिर थे, जिन पर मकबरा बना दिया गया. दावा है कि मकबरे की इमारत के अंदर कमल पुष्प, त्रिशूल जैसे हिंदू धार्मिक चिह्न बने हैं. मंदिर का परिक्रमा मार्ग है, धार्मिक कुआं है. छत्र की जंजीर आज भी मौजूद है. ये सब किसी मस्जिद या मकबरे में नहीं होती. इसी दावे के साथ अब हिंदू पक्ष इस मकबरे को मंदिर होने का दावा कर रहा है. जबकि असली लड़ाई जमीन के स्वामित्व को लेकर है।
फतेहपुर में क्या विवाद?
विवाद जमीन का है लेकिन सियासत धर्म-मजहब की. और इसी चक्कर में हिंदूवादी संगठनों ने 11 अगस्त को पुलिस की मौजूदगी में मकबरे के अंदर घुसकर तोड़फोड़ की थी । इसके बाद मुस्लिम समुदाय की ओर से पत्थरबाजी की गई लेकिन किसी तरह पुलिस ने हालात संभाल लिए. इसके बाद पुलिस ने 10 नामजद समेत 150 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा कायम कियाहै। इसमें अभिषेक शुक्ला, बजरंग दल जिला संयोजक धर्मेंद्र सिंह, आशीष त्रिवेदी, समाजवादी पार्टी नेता पप्पू सिंह चौहान, बीजेपी युवा मोर्चा जिला महामंत्री प्रसून तिवारी, सभासद ऋतिक पाल, सभासद विनय तिवारी, बीजेपी जिला महामंत्री पुष्पराज पटेल, जिला पंचायत सदस्य अजय सिंह और देवनाथ धाकड़े नामजद है। इसके अलावा, 150 अज्ञात व्यक्तियों को भी इस मामले में शामिल किया गया है. इन आरोपियों को पकड़ने के लिए 5-5 पुलिस टीमें बनाई गईं लेकिन ये पकड़े नहीं जा सके ।

 

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