दिल्ली भाजपा के वो चेहरे जिनकी वजह से 27 साल के बाद भाजपा ने फतह किया राजधानी का किला
नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने दिल्ली में 27 वर्षो के बाद सत्ता में वापिसी करती हुई दिखाई दी है। यह जीत ऐतिहासिक है क्योंकि 21वीं सदी में पहली बार भाजपा ने दिल्ली में विधानसभा चुनाव जीतकर सरकार बनाने का रास्ता साफ किया है। भाजपा ने इस तीज के लिये कोई कसर नहीं छोड़ी। पार्टी ने आम आदमी पार्टी के बड़े चेहरों के खिलाफ दमदार उम्मीदवार उतारे और पीएम नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चुनावी रणनीति को मजबूती से लागू किया। वर्ष 2015 और 2020 के चुनाव में करारी हार के बावजूद इस बार भाजपा ने दिल्ली की सत्ता पर वापिसी करने का ठोस खाका तैयार किया और उसे बखूबी लागू भी किया है।
शुरूआत से ही भाजपा की थी मजबूत तैयारी
महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही भाजपा ने दिल्ली की तैयारियां शुरू कर दी थी। बैजयंत पांडा को दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिये चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया है। पार्टी ने अतुल गर्ग को सहप्रभारी बनाया गया और दोनों को दिल्ली चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गयी।
बैजयंत पांडा
भाजपा सांसद बैजयंत पांडा को दिल्ली चुनाव के लिये चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गयी। इससे पहले, वह दिल्ली के संगठन प्रभारी रह चुके थे और संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। उनके अनुभव का लाभ भाजपा को राष्ट्रीय राजधानी में मिला। बीजेपी 1998 से दिल्ली की सत्ता से बाहर है और अंतिम बार 1993 में सरकार बनाई थी। हालांकि, लोकसभा चुनावों में भाजपा ने लगातार 3 बार दिल्ली की 7 सीटें जीती है।
प्रवेश वर्मा
दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रवेश शर्मा सबसे चर्चित चेहरों में से एक बनकर उभरे हैं। उन्होंने नयी दिल्ली सीट से अरविंद केजरीवाल को हराकर बड़ी जीत दर्ज की है। जबकि कांग्रेस के संदीप दीक्षित तीसरे स्थान पर रहे। पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा पहले भाजपा के सांसद रह चुके हैं। चुनाव प्रचार के दौरान वह लगातार सुर्खियों में रहे। खासकर विवादास्पद बयानों और आचार संहिता उल्लंघन के आरोपों को लेकर, उनपर नयी दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में जूते और साड़ी बांटने का आरोप लगा, जिसके चलते चुनाव आयोग ने पुलिस से शिकायत दर्ज करने को कहा है। उन्होंने पंजाब की गाडि़यों के दिल्ली आने पर सवाल उठाये। जिससे विपक्ष ने उन्हें घेरा, आम आदमी पार्टी ने उन पर मतदाताओं को लुभाने का आरोप लगाया है। हालांकि उन्होंने इसे खारिज कर दिया।

