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डोनाल्ड ट्रम्प की सरकार बनने पर भारत को लाभ या नुकसान? डोनाल्ड ट्रम्प का रूख क्या कहता है

नई दिल्ली. अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव का काउंटडाउन तकरीबन खत्म होने वाला है। रिपब्लिकन कैंडिडेट डोनाल्ड ट्रम्प और डेमोक्रेट उम्मीदवार कमला हैरिस के बीच कड़ा मुकाबला है। अगर ट्रम्प अमेरिकी राष्ट्रपति बनते हैं तो इसका भारत पर भी असर पड़ना तय है। डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत और यूएस के संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है। दिवाली के खास मौके पर ट्रम्प ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपना दोस्त बताया था और साथ ही अपनी सरकार आने पर दोनों देशों के बीच की साझेदारी को आगे बढ़ाने का वादा किया है।
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में बांग्लादेश में तख्तापलट के दौरान हिन्दुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हुुई हिंसा की भी कड़ी निंदा की है। अबतक कई सारी ऐसी रिपोर्ट्स सामने आ चुकी है। जो इस बात की तस्दीक करती है कि बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद सैकड़ों हिन्दुओं को जानलेवा हमलों का सामना करना पड़ा था।
ट्रेड पॉलिसीज और इकोनॉमिक
डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व वाला प्रशासन साफतौर पर अमेरिका केन्द्रित ट्रेउ पॉलिसीज पर ही जोर देगा और साथ ही भारत पर व्यापार बाधाओं को कमकरने और टैरिफ का सामना करने का दबाव डालेगा। ऐसे में भारत का आईटी, फर्मास्यूटिकल्स और टैक्सटाइल क्षेत्र का निर्यात बड़े स्तर पर प्रभावित हो सकता है। इसी साल सितम्बर में ट्रंप ने आयात शुल्क के मामले में भारत को एब्यूजर यानी दोहन करने वाले की संज्ञा दी थी। इसके बावजूद उन्होंने प्राधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें शानदार व्यक्ति बताया था। मिशिगन के फ्लिंट में एक टाउन हॉल के दौरान, व्यापार और शुल्कों पर चर्चा करते हुए ट्रम्प ने कहा था कि इस मामले में भारत एक बहुत बड़ा एब्यूजर है। यह लोग सबसे चतुर लोग है। वह पिछड़े नहीं है। भारत आयात के मामले पर शीर्ष पर है। जिसका उपयोग वह हमारे खिलाफ करता है।
एच-1बी वीजा पॉलिसीज और इमिग्रेशन
इमिग्रेशन पर डोनाल्ड ट्रम्प की प्रतिबंधात्मक नीतियों, विशेष रूप से एच-1बी वीजा प्रोग्राम ने अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल्स पर काफी अधिक प्रभाव डाला है। ऐसी नीतियों की वापिसी से भारतीयों के लिये अमेरिका जॉब मार्केट में नौकरी हासिल करना थोड़ा कठिन हो जायेगा और साथ ही जो भी क्षेत्र भारतीय श्रमिकों पर अधिक निर्भर है। उन पर प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा सख्त इमिग्रेशन कानून भारतीय तकनीकी फर्मो को अन्य बाजारों की तलाश करने या फिर डोमेस्टिक मार्केट में अधिक मौका बनाने के लिये प्रेरित कर सकता है।
रक्षा-सुरक्षा
चीन को लेकर भारत की जो भी चिंताएं हैं, वह डोनाल्ड ट्रंप के रुख से मेल खाता है. ट्रंप प्रशासन के नेतृत्व में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग और बेहतर और मजबूत होने की संभावनाएं हैं. पिछली बार ट्रंप के ही कार्यकाल में ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीनी प्रभाव का मुकाबला करने के लिए अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच सुरक्षा साझेदारी क्वाड को मजबूत किया गया था. चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के साथ तनाव के बीच अतिरिक्त संयुक्त सैन्य अभ्यास, हथियारों की बिक्री और टेक्नोलॉजी का हस्तांतरण भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर सकते हैं.
जियो पॉलीटिकल प्रभाव
साउथ एशिया में डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां भारत के क्षेत्रीय हितों को भी प्रभावित कर सकती हैं. दरअसल, हाल ही में ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ काम करने की इच्छा तो जताई थी, लेकिन संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्होंने आतंकवाद विरोधी प्रयासों में जवाबदेही पर जोर दिया है. हालांकि, ट्रंप के ‘ताकत के जरिए शांति’ मंत्र के कारण अमेरिका आतंकवाद और उग्रवाद पर कड़ा रुख अपना सकता है, जो भारत के पक्ष में काम कर सकता है. ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल में भी पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य सहायता में कटौती कर दी थी.

 

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