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टेकनपुर बीएसएफ अकादमी के प्रशिक्षण केंद्र में पहली बार दो विधाओं में प्रशिक्षित होंगे देसी नस्ल के श्वान

ग्वालियर. टेकनपुर में स्थित देश की इकलौती बीएसएफ अकादमी के श्वान प्रशिक्षण केंद्र में पहली बार दो-दो विधाओं में पारंगत देसी नस्ल के श्वान तैयार किए जाएंगे। अब तक ये एक ही विधा में पारंगत हो पाते थे। जैसे नारकोटिक्स के लिए तैयार श्वान बम डिस्पोजल के क्षेत्र में काम नहीं कर पता था तो बम डिस्पोजल में पारंगत श्वान हंटिंग या गश्ती दल को बेहतर सेवाएं नहीं दे पाता था। अब एक श्वान दो विधाओं में पारंगत किया जा रहा है। मसलन, नारकोटिक्स में प्रशिक्षित श्वान बम डिस्पोजल में भी काम कर सकेगां प्रशिक्षण केंद्र के अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प (वोकल फॉर लोकल) को उन्होंने सूत्र वाक्य और मंत्र बनाया, इसी कड़ी में यह नवाचार किया गया है।

20 प्रतिशत श्वान अब देसी नस्ल के शामिल
सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों के अनुसार केंद्र एक साल में करीब पांच हजार श्वानों को प्रशिक्षित करता है। वोकल फार लोकल के तहत 100 में से 20 प्रतिशत श्वान देसी नस्ल के होते हैं। इनमें रामपुर हाउंड, मुधोल हाउंड जैसी अलग-अलग देसी नस्लें शामिल होती हैं। देसी नस्ल के श्वानों के प्रशिक्षण में छह से नौ महीने का समय लगता है, कुछ श्वान समय से पहले भी प्रशिक्षित हो जाते हैं। कोरोना की दूसरी लहर के बाद शुरू हुए छह माह से नौ माह के प्रशिक्षण काल का समय दिसंबर 2021 तक पूरा होगा। संभवत: नए वर्ष के पहले माह में दो विधाओं में प्रशिक्षित श्वानों को अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों को सौंप दिया जाएगा।

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