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जीवाजी विश्वविद्यालय से संबद्ध 200 कॉलेजों की मुश्किलें बढ़ीं

ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त कॉलेजों की मुश्किलें अब बढ गई है। झुंडपुरा कॉलेज के मामले में जेयू में लागू हुई धारा 52 और कुलगुरू को बर्खास्त किए जाने का प्रभाव हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में चल रही जनहित याचिका में देखने को मिला। शुक्रवार को हाईकोर्ट में हुई कॉलेजों में अनियमितता को लेकर यचिका की सुनवाई में हाईकोर्ट ने ईओडब्ल्यू को जेयू से संबद्धता प्राप्त सभी कॉलेज के अनियमितताओं के संबंध में जांच करने और आरोपितों के खिलाफ न्यायालय में यथशीघ्र आरोप पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। मामले की सुनवाई में जीवाजी विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि झुंडपुरा कॉलेज के संबंध में ईओडब्ल्यू द्वारा एफआईआर दर्ज कर ली गई है और शासन द्वारा आरोपित कुलगुरू की नियुक्ति भी कर दी गई है।
फर्जी डिग्रयां बांट रहे कॉलेज
इस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने हाईकोर्ट को बताया कि ईओडब्ल्यू केवल झुंडपुरा के शिवशक्ति कॉलेज के मामले की जांच कर रहा है जबकि झुंडपुरा के जैसे ही जेयू से संबद्धता प्राप्त 200 कॉलेज है जो जमकर फर्जी डिग्रियां बांट रहे है।
सभी कॉलेजों की जांच
इस मामले को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए आदेश पारित किया कि झुुंडपुरा की तरह ही जीवाजी विश्वविद्यालय से संबंधित सभी कॉलेजों की अनियमितताओं, औपचारिकताओं और अन्य अपराधों के संबंध में ईओडब्ल्यू जांच कर दोषियों के वि़़रुद्ध शीघ्र से शीघ्र सक्षम न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत करें। इसमें जेयू भी पूरी सहायता प्रदान करे।
प्राचार्य की फर्जी नियुक्ति
मुरार निवासी डा. अरुण शर्मा ने एक जनहित याचिका अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया के माध्यम से हाई कोर्ट में प्रस्तुत की है कि झुंडपुरा जिला मुरैना में शिव शक्ति कॉलेज के नाम से जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर से एक कॉलेज मान्यता प्राप्त बताया गया। इसमें प्राचार्य के पद पर उनकी नियुक्ति बताई गई है, जबकि उन्होंने उक्त कॉलेज में प्राचार्य की नियुक्ति के लिए कभी भी कोई साक्षात्कार नहीं दिया और न ही उन्हें उक्त कॉलेज के संबंध में कोई जानकारी है।
न बिल्डिंग, न ही स्टाफ चल रहे कॉलेज
उन्होंने याचिका में यह भी कहा कि वह स्वयं झुंडपुरा जिला मुरैना के निवासी हैं। शिव शक्ति कॉलेज नाम का कोई भी कॉलेज झुंडपुरा या जिला मुरैना में स्थित नहीं है। कॉलेज केवल कागजों में संचालित हैं। न तो कॉलेज की बिल्डिंग है और न ही स्टाफ है। छात्रों को भी नहीं पढ़ाया जाता है।

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