जीवाजी विश्वविद्यालय के फर्जी कॉलेज मामले में ईओडब्ल्यू से किया जवाब-तलब, हाईकोर्ट ने पूछा जांच के लिये क्यों एसआईटी का गठन किया जाये
ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय से संबंद्ध झुण्डपुरा फर्जी कॉलेज के मामले में जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने इस प्रकरण में EOW समेत शासन से जवाब -तलब किया है। हाईकोर्ट ने पूछा है कि अभी तक इस मामले में क्या कार्यवाही की गयी है और साथ ही हाईकोर्ट ने पूछा है कि विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांच के लिये क्यों न ’’स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम‘‘ का गठन किया जाये। हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में ईओडब्ल्यू के अधिकारियों से इस संबंध में जवाब मांगा है।
इस मामले में शिकायककर्त्ता डॉ. अरूणकुमार शर्मा ने एडवोकेट अवधेश सिंह भदौरिया के माध्यम से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट खंडपीठ ग्वालियर में मुरैना के झुण्डपुरा में फर्जी कॉलेज को लेकर याचिका लगाई थी। इसमें ईओडब्ल्यू द्वारा जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलपति समेसत 17 प्रोफेसरों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज की गयी है। इस मामले में हाईकोर्ट द्वारा विश्वविद्यालय समेत ईओडब्ल्यू को सभी मामलों में व्यापक जांच कर दोषी अधिकारियों को चिन्हित कर उनके विरू द्ध न्यायालय में जल्द से जल्द आरोप पत्र प्रस्तुत करने के लिये आदेशित किया था। हाईकोर्ट के उक्त आदेश के बाद याचिकाकर्त्ता द्वारा स्वयं ग्वालियर चम्बल संभाग में विश्वविद्यालय से संबंद्ध सभी कॉलेज का निरीक्षण किया गया। जिसमें केवल कागजों पर संचालित लगभग 100 से अधिक फर्जी कॉलेज पाये गये हैं।
SIT बनाने, IPS अधिकारी को प्रभारी बनाने की मांग
एडवोकेट भदौरिया ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता ने इन 100 फर्जी कॉलेजों की सूची यूनिवर्सिटी सहित ईओडब्ल्यू के सुपुर्द की। लेकिन ईओडब्ल्यू और यूनिवर्सिटी इन कॉलेजों के खिलाफ कोई विधिक कार्रवाई नहीं कर रही, न ही उनके पास पर्याप्त साधन हैं। ईओडब्ल्यू का सिर्फ एक अधिकारी विवेचना कर रहा है। उससे उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह इतने बड़े घोटाले और भ्रष्टाचार की विवेचना यथाशीघ्र पूर्ण कर पाएगा। इसलिए उक्त कॉलेजों में व्याप्त संपूर्ण भ्रष्टाचार की जांच हाई कोर्ट अपनी निगरानी में कराए। जांच के लिए ईओडब्ल्यू में एक SIT का गठन किया जाए। इसमें आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में डीएसपी एवं इंस्पेक्टर लेवल के कम से कम 21 अधिकारियों को सम्मिलित किया जाए। महीने में एक तय तिथि पर यूनिवर्सिटी एवं ईओडब्ल्यू से उक्त मामले की प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश कर विधिवत सुपरविजन किया जाए। मामले की यथाशीघ्र विवेचना कर दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध यथाशीघ्र सक्षम न्यायालय में चालान प्रस्तुत कराया जाए।
हाईकोर्ट ने 4 सप्ताह में मांगा जवाब
हाईकोर्ट इस बात से पूर्णतः सहमत था कि इतने बड़े भ्रष्टाचार की जांच एक या दो अधिकारियों से यथाशीघ्र पूर्ण नहीं कराई जा सकती है तो इसके लिये एसआईटी आवश्यक है। हाईकोर्ट द्वारा इस संबंधम में गृह मंत्रालय के प्रमुख सचिव समेत डीजीपी और ईओडब्ल्यू के एसपी समेत जीवाजी विश्वविद्यालय के कुल सचिव को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब पेश करने का आदेश जारी किया है।

