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जीवाजी यूनिवर्सिटी का नर्सिंग फर्जीवाड़ा, 209 फर्जी मार्कशीट बनीं

ग्वालियर. जीवाजी यूनिवर्सिटी में बीएससी नर्सिंग चतुर्थ वर्ष की 209 फर्जी मार्कशीट बनाए जाने का मामला 3 जांचों के बाद भी अनसुलक्षा है। आखिरी जांच रिपोर्ट यूनिवर्सिटी द्वारा बनाई गई तीन सदस्यीय समिति की है। इस समिति में सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव शर्मा, सेवानिवृत्त आईपीएस हरीसिंह यादव और सेवानिवृत्त आईएएस आरके जैन शामिल है।

जानकारी के अनुसार कर्मचारियों पर आरोप सिद्ध नहीं होते है इससे पहले की एक जांच रिपोर्ट में जेयू के परीक्षा और गोपनीय सेल देखने वाले दो अफसरों की भूमिका इस फर्जीवाड़े में बताई गई थी। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यूनिवर्सिटी के सिस्टम के बीच में आकर 209 फर्जी मार्कशीट किसने बनाई और कैसे बन गई। विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर पूर्व कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला द्वारा जो अभिमत राजभवन भेजा गया था उसमें स्पष्ट किया गया है कि प्रस्तुतकर्ता अधिकारी के द्वारा सभी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए।

चार्ट के फोंट बदले हैं लेकिन अफसरों ने किया अनदेखा- कर्मचारी
जेयू में कर्मचारी सतर्क थे, एक कर्मचारी ने विभागीय जांच समिति को बताया कि टेबुलेशन चार्ट के कुछ पेज के फोंट बदले हुए होने की बात पता चला थी, इसकी जानकारी तत्काल अधिकारियों को दी गई थी। यह फर्जीवाड़ा इसी स्तर पर रोका जा सकता था लेकिन नहीं रोका गया। इससे स्पष्ट हो रहा है कि अधिकारियों तक गड़बड़ी होने की आशंका की सूचना पहुंच गई थी फिर भी रोकथाम नहीं की गई। विभागीय जांच समिति के सामने पूरा मामला प्रस्तुत करने में कमी सामने आई है। इसकी रिपोर्ट भी राजभवन भेजी गई है। यानी इस दो बिंदुओं से यह तो लग रहा है कि अफसरों को बचाने के लिए कुछ ताे हुआ है।

अनूप अग्रवाल की शिकायत के बाद यह मामला सामने आया 
जीवाजी यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित मेडिकल कोर्सों की परीक्षा लंबे समय से विवाद के दायरे में रही है। कार्यपरिषद सदस्य रहे अनूप अग्रवाल ने नर्सिंग कोर्सों में फर्जीवाड़ा किए जाने की शिकायत के बाद यह मामला सामने आया था। नवंबर 2020 में टेबुलेशन चार्ट की सॉफ्ट कॉपी और हार्ड कॉपी का मिलान किया गया तो यह अलग-अलग निकले यानी टेबुलेशन चार्ट जो रिजल्ट का रिकॉर्ड होता है उसके पेज बदले गए थे। इसके बाद 5 कर्मचारियों को निलंबित किया गया। प्रारंभिक जांच समिति बनाई गई। विधिक राय ली गई। इसके बाद रिटायर्ड जज, आईपीएस और आईएएस की जांच समिति बनाई गई थी। मार्च 2021 में इस मामले में धोखाधड़ी की एफआईआर भी दर्ज करा दी गई।

 

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