चम्बल में 1 हजार लोग बेघर, घर का सामान बहा और ग्रामीण 3 दिन से भूखे
मुरैना. मध्यप्रदेश में लगातार 2 दिन हुई भारी वर्षा के दौर को 4 दिन बीत चुके हैं। अब पानी उतरने के बाद बाढ़ के जख्म नजर आ रहे हैं। चम्बल नदी किनारे लगभग 1000 लोग बेघर हो गये है। बीहड़ों में टीलों पर खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर है। बेतवा नदी में आये उफान में किसानों की फसलें बर्बाद हो गयी है। लोगों के गृहस्थी का सामान बह गया। मवेशी बह गये है जो बचे हैं उनके सामने चारा-पानी का संकट है। लोग रोटी-दवाई के लिये जिला प्रशासन की मदद की राह देख रहे है।
मुरैना जिले में धौलपुर हाइवे के पास भानपुर गांव
गुरूवार की सुबह 11 बजे जब हम यहां पहुंचे तो चारों और बर्बादी का मंजर था। यह गांव चम्बल नदी के किनानरे हैं। इस गांव के लगभग 1000 लोग बेघर हो चुके हैं। कुछ लोग अब भी फंसे हुए हैं। जिला प्रशासन ने इन लोगों के खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं की है। कई ग्रामीणों के मवेशी भी अभी तक पानीमें फंसे हुए है। कितने बह चुके है, इसका आकलन अभी नहीं हो पा रहा है। लोग जिला प्रशासन से राहत की आस लगाये बैठे।
मंगलवार की रात 3 बजे अचानक गांव में पानी घुस आया। रात में ही उन्हें गांव छोड़कर भागना पड़ा। अचानक बांढ़ आने पर लोग अपना सामान भी नहीं समेट पाये और अपने बच्चों को लेकर गांव के बाहर बैठ गये। घर के भीतर लाखों रूपये का गृहस्थी का सामन रखा है। सब पानी में बर्बाद हो रहा है। अधिकांश ग्रामीण इस बात को लेकर परेशान हैं कि मवेशियों को क्या खिलायेंगे, उनका चारा, भूसा, अनाज और खेतों में मौजूद बाजरा व अन्य खाने-पीने का सामान सब कुछ पानी में बह चुका है।
जहां पानी थोड़ा कम है, वहां लोग अपने घरों से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्दी प्रशासन ने उनकी मदद नहीं की तो उनके सामने मरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। भानपुर के अलावा जैतपुर, वरवासीन, कितोई, गजापुरा, रिठूरा, कुठारू, दवग गांवों का संपर्क भी बाकी के इलाकों से टूट गया है।

