ग्वालियर में सोशल मीडिया के जरिए चल रहा अवैध हथियारों का कारोबार
ग्वालियर. दो नंबर के हथियारों का धंधा भी हाइटेक हो रहा है। सोशल मीडिया पर इन दिनों हथियारों की मंडी लगने लगने लगी है। हथियार तस्करी से जुड़े लोग ग्राहक से रूबरू संपर्क कर सौदा करने के बजाय ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं, लेकिन अवैध हथियारों के कारोबार का यह तरीका पुलिस का सिरदर्द बढ़ा रहा है। पूरा कारोबार इंटरनेट ओर मोबाइल के जरिए चल रहा है तो यह पता लगाना पुलिस के लिए मुश्किल हो रहा है कि खरीदार कौन हैं और बेचने वाला कौन है।
मैसेंजर एप के जरिए कारोबार चला रहे
हथियार तस्करी का नया तरीका पिछले कुछ समय से चलन में आया है। पुलिस अधिकारी कहते हैं अवैध हथियार बेचने वाले सोशल मीडिया के मैसेंजर एप के जरिए कारोबार चला रहे हैं। इन लोगों ने ग्रुप बना रखे हैं। खरीदार भी इन ग्रुप से जुड़े हैं और बेचने वाले भी। वैसे तो अपराधियों की टोली में मुखबिर फिट होते थे, लेकिन सोशल मीडिया के ग्रुप में मुखबिरों की एंट्री मुश्किल है।
अंचल में हथियारों की सप्लाई, कारोबारी पकड़ से बाहर
क्राइम ब्रांच एएसपी राजेश दंडोतिया का कहना है ग्वालियर और चंबल रेंज में देसी तमंचे, रिवॉल्वर और पिस्टल की डिमांड रहती है। इसके अलावा यूपी, राजस्थान और हरियाणा में भी इस रूट से ही हथियार सप्लाई होते हैं। इन्हें मुहैया कराने वालों का सेंटर खंडवा और खरगोन हैं। इस कारोबार से जुडे तमाम लोगों को पकड़ा गया है। पहले हथियार कारोबारी ग्राहक से फोन पर सौदा तय कर एजेंट के जरिए डिलेवरी करवाते थे। तस्करी करने वालों के बारे में इनपुट आसानी से मिलता था, लेकिन अब हथियार तस्कर भी सोशल मीडिया के जरिए कारोबार चला रहे हैं। हथियार का डेमो सोशल मीडिया पर दिखाते हैं। उसके जरिए ही सौदा तय होता है। इसलिए अब साइबर ङ्क्षवग के जरिए हथियार तस्करों के सौदे पर नजर रखी जा रही है।

