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हेमंत खंडेलवाल ने सिंधिया खेमे को साधकर खिलाया था कमल

भोपाल. भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष चुने गए बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल चुनावी प्रबंधन के माहिर खिलाड़ी हैं। 22-23 साल की उम्र में वह अपने पिता विजय खंडेलवाल का चुनाव अभियान पर्दे के पीछे से संचालित करते रहे। 2018 के विधानसभा चुनाव में सत्ता गवां चुकी भाजपा 2020 में कमलराज के खिलाफ जिस विद्रोह से सत्ता में आई, उसमें समन्वय की बड़ी भूमिका हेमंत खंडेलवाल की भी रही।
हारकर भी शिवराज को सीएम बनाने में अहम भूमिका
बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में कांग्रेस के कुछ विधायकों द्वारा किए गए विद्रोह को भाजपा ने साधा और अपने साथ शामिल कर नई सरकार बनाने की बातचीत शुरू की। उनको टूटने से बचाने के लिए भाजपा शासित कर्नाटक के बेंगलुरु ले जाया गया। कांग्रेस के सिंधिया के खेमे और भाजपा नेतृत्व के बीच समन्वय की जिम्मेदारी जिन नेताओं को मिली, उसमें प्रदेश भाजपा के तत्कालीन संगठन चुनाव प्रभारी हेमंत खंडेलवाल प्रमुख थे। भाजपा का वह अभियान सफल रहा और शिवराज सिंह चौहान चुनाव हारने के बाद भी मुख्यमंत्री बनने में सफल रहे।
सभी 29 सीटों पर भाजपा ने जीत
इसके बाद से ही केंद्रीय नेतृत्व बड़े चुनाव प्रबंधन में इनकी जिम्मेदारी बढ़ाता गया। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें प्रदेश चुनाव समिति का संयोजक बनाया गया। यहां की सभी 29 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की। हेमंत खंडेलवाल ने वर्ष 2014 से 2018 तक पार्टी के प्रदेश कोषाध्यक्ष का दायित्व भी निभाया। वर्ष 2010 से 2013 तक उन्होंने भाजपा के बैतूल जिलाध्यक्ष का दायित्व भी संभाला।

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