श्रीआनंदपुर धाम में युद्ध, संघर्ष, मानवीय मूल्यों से जुडी चिंतायें हमारे सामने-नरेन्द्र मोदी
अशोकनगर. ईसागढ़ स्थित श्रीआनंदपुर धाम पहुंचे पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि आनंदपुर धाम में आकर मन अभिभूत है। हृदय आनंद से भर गया। जिस भूमि का कण-कण संतों की तपस्या से सींचा गया हो, जहां परमार्थ परंपरा बन गया है। वह धरती साधारण नहीं है, हमारे संतों ने अशोकनगर के बारे में कहा था कि यहांशोक आने से डरता है।
पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि दुनिया में भौतिक उन्नति के बीच मानवता के लिये युद्ध, संघर्ष और माननीय मूल्यों से जुडी कई चिंतायें हमारे सामने है। इनकी जड़ में क्या है, इनकी जड़ में अपने और पराये की मानसिकता है। यह मानसिकता मानव से मानव को दूर करती है। आज विश्व भी सोच रहा है इनका समाधान कहां मिलेगा। इनका समाधान अद्वैत के विचार में मिलेगा। अद्वैत यानी यहां कोई द्वैत नहीं है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुख्यमंत्री मोहन यादव, केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा मौजूद हैं।
श्री आनंदपुर धाम की स्थापना की कहानी
कहा जाता है कि जब परमहंस दयाल जी महाराज (प्रथम पादशाही) आगरा में सत्संग दे रहे थे, तब ईसागढ़ निवासी सेठ पन्नालाल मोदी ने उनसे गांव आने का निवेदन किया। बाद में, द्वितीय पादशाही श्री परमहंस स्वरूप आनंद जी महाराज ने सन् 1929 में ग्वालियर राज्य में पदार्पण किया और ईसागढ़ क्षेत्र को परमार्थ का उपयुक्त स्थल माना। सन् 1930 में भक्तों ने कठिन परिश्रम से उबड़-खाबड़ भूमि को हरे-भरे उद्यान में परिवर्तित किया और यहीं पर श्री आनंदपुर धाम की स्थापना हुई, जिसने क्षेत्रीय संस्कृति और आध्यात्मिकता को नया स्वरूप दिया। आनंदपुर धाम की स्थापना आध्यात्मिक और परोपकारी उद्देश्यों के लिए की गई है। 315 हेक्टेयर में फैले इस क्षेत्र में 500 से अधिक गायों के साथ एक आधुनिक गौशाला है और श्री आनंदपुर ट्रस्ट परिसर के अंतर्गत कृषि गतिविधियां संचालित की जाती हैं।

