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मुर्शिदाबाद हिंसा-ममता सरकार का झुकाव पीडितों के बजाय  हमलावरों की ओर है?

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर के दौरान जमकर हिंसा हुई है। लगभग 3 लोगों के मारे जाने की खबर आ रही है। हिंसा के दौरान ही जान बचाकर लगभग 500 हिन्दुओं ने मालदा जैसे दूसरे इलाकों में शरण ली है। बहुत से लोग और लोग यहां पलायन के मूड में है। शायद इसलिये ऐसा कहा जा रहा है कि मुर्शिदाबाद में हुई घटना में दंगा करना या लिखना सरासर गलत है। क्योंकि दंगा शब्द का अर्थ यह है कि जब दो समुदायों के बीच नफरती हिंसा हो।
यहां तो मामला ही एक तरफा दिख रहा है। साफ दिखता है कि यह वक्फ बिल विरोधियों की प्रायोजित हिंसा है। जब प्रदेश की सीएम ममता बनर्जी स्वयं कह रही है कि पश्चिम बंगाल सरकार राज्य में वक्फ संशोधन अधिनियम का ेवह लागू नहीं करेगी तो फिर हिंसक प्रदर्शन की जरूरत क्यों पड़ गयी? कहीं ऐसा तो नहीं हुआ है कि सीएम के बयान के बाद हिंसा करने वालों को नैतिक समर्थन मिल गया और वह अपना काम करने के लिये सड़कां पर आ गये। उन्होंने निर्दोष स्थानीय हिन्दू रहवासियों को निशाना बना दिया। भाजपा का कहना है कि ममता सरकार ने टीचर्स भर्ती घोटाले से ध्यान भटकाने के लिये ऐसा किया है। क्या वास्तव में मुर्शिदाबाद हिंसा की दोषी मामला सरकार है।

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