पूरा पाकिस्तान ब्रह्मोस की रेजं में, ऑपरेशन सिंदूर तो महज ट्रेलर था-राजनाथ सिंह

लखनऊ. यूपी की राजधानी लखनऊ ने शनिवार को देश की सामरिक शक्ति को नई ऊंचाईयों पर पहुंचा दिया है। यहां बने एयरोस्पेस यूनिट से सुपरसोनिक ब्रम्होस मिसाइलों के पहले बैच को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और सीएम योगी आदित्यनाथ ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है। इस बीच रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है।
हर वर्ष 80-100 ब्रम्होस मिसाइलों का उत्पादन
केवल 5 माह में इस यूनिट ने अपना पहला उत्पादन पूरा कर लिया जो कि भारत के रक्षा निर्माण इलाके में कीर्तिमान है। इस यूनिट का लक्ष्य प्रतिवर्ष 80 से 100 ब्रम्होस मिसाइलों का उत्पादन करना है। यह प्रोजेक्ट उत्तरप्रदेश के डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के 6 नोड्स में से एक है। जिसे लखनऊ में विशेष रूप से तैयार किया गया है। कार्यक्रम में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा ब्रह्मोस अब केवल एक मिसाइल नही, बल्कि भारत की बढ़ती हुई स्वदेसी सैन्य क्षमता का प्रतीक है। इसमें पारंपरिक वारहेड, एडवांस गाइडेंस सिस्टम और सुपरसोनिक स्पीड का ऐसा कॉम्बिनेशन है जो इसे दुनिया की सर्वश्रेष्ठ मिसाइलों में शामिल करता है। उन्होंने कहा है कि ब्रम्ह्ोस अब थलसेना, नौसेना और वायुसेना तीनों की रीढ़ बन चुकी है। देश के नागरिकों के मन में ब्रम्ह्ोस के नाम से एक विश्वास और गर्व की भावना जुड़ी हुई है।
पूरा पाकिस्तान ब्रम्ह्ोस की रेंज में-रक्षामंत्री
राजनाथ सिंह ने कहा है कि लखनऊ में ब्रह्मोस यूनिट की स्थापना इस बात का प्रमाण है कि भारत जब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि रक्षा तकनीक में उप्पादक देश बन चुका है। ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस की कामयाबी ने यह साबित कर दिया है कि हमारी मिसाइलें सिर्फ परीक्षण नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल प्रूफ ऑफ स्ट्रेंथ है। इस बीच उन्होंने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर तो सिर्फ ट्रेलर था। पाकिस्तान की पूरी जमीन ब्रह्मोस की रेंज में है। उन्होंने यह भी कहा हैकि अब जीत भारत के लिये कोई घटना नहीं बल्कि एक आदत बन चुकी है। जिसमें हमें और मजबूत बनाना है।
ब्रह्मोस से क्यों खौफ खाते हैं दुश्मन
– मिसाइल ध्वनि की गति से 2.8 से 3 गुना तेज (Mach 2.8–3) उड़ सकती है.
– इसे जमीन, हवा और पानी तीनों प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है.
– यह Fire and Forget तकनीक पर आधारित है, यानी लॉन्च होने के बाद किसी और इनपुट की जरूरत नहीं होती.
– यह 290 किलोमीटर से 500 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है, जबकि नवीनतम वर्जन 800 किमी तक मार करने में सक्षम है.
– यह 200-300 किलोग्राम तक का पारंपरिक या न्यूक्लियर वारहेड ले जा सकती है.
– इसकी स्टेल्थ तकनीक दुश्मन के रडार से बच निकलने में मदद करती है.
– Su-30 MKI लड़ाकू विमान से भी इसे लॉन्च किया जा सकता है.
भारत के रक्षा इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट: रक्षा विशेषज्ञ
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह भारत के रक्षा इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट है. ब्रह्मोस की पहली खेप का लखनऊ से रवाना होना भारत की आत्मनिर्भरता, वैज्ञानिक क्षमता और औद्योगिक सामर्थ्य का जीवंत उदाहरण है. अब भारत न केवल अपनी सुरक्षा जरूरतें पूरी कर सकेगा, बल्कि मित्र देशों की रक्षा क्षमता को भी मजबूत बना सकेगा.

