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गुपचुप ढंग से दुष्कर्मी तहसीलदार ने बैतूल कराया ट्रांसफर , पुलिस को भनक नहीं लगी

ग्वालियर. तहसीलदार शत्रुघ्नसिंह चौहान पर दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज हुए 38 दिन हो गये है। लेकिन पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पायी है। पुलिस का दावा है कि वह तहसीलदार के ठिकानों पर दविश दे रही है। लेकिन इन दविश की सच्चाई हाल ही में खुली है। 15 जनवरी को एफआईआर दर्ज होने के 7 दिन के अंदर तहसीलदार ने गुपचुप ढंग से बैतूल ट्रांसफर करवा लिया है।
जबकि पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी और जिला प्रशासन ने पुलिस को उसके ट्रांसफर की सूचना तक नहीं दी। पुलिस ने शनिवार की रात को भी तहसीलदार की तलाश में दविश दी है। लेकिन वह हाथ नहीं आ पाया । मोबाइल नम्बर बन्द कर लिया है। बैतूल जहां ट्रांसफर लिया है। वहां तहसीलदार ने ज्वाइन नहीं किया है।
विवादों में रहते हैं तहसीलदार शत्रुघन सिंह
तहसीलदार चौहान फरार है,  इससे पहले भी जमीनों के मामले में विवाद सामने आया। एक कर्मचारी द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकायत की। तहसीलदार चौहान पर दुष्कर्म जैसी FIR होने के बाद भी वह पकड़ में नहीं आ रहा है। आमतौर पर पुलिस सामान्य आरोपियों को जल्द पकड़ लेती है ,लेकिन यहां तहसीलदार का मामला है तो वह फरार चल रहा है।
अग्रिम जमानत हो चुकी है खारिज, कोर्ट ने पूछा-नौकरी कैसे कर रहा
ग्वालियर में दुष्कर्म का मामला दर्ज होने के बाद तहसीलदार शत्रुघन सिंह चौहान ने पहले जिला एवं सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन लगाया था, जिसको सेशन कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद तहसीलदार चौहान ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई, लेकिन वहां से भी अग्रिम जमानत का आवेदन खारिज हो गया। इसके बाद पुलिस ने तीन दिन पहले तहसीलदार पर पांच हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते समय जस्टिस ने लिखा था कि इतने अपराध दर्ज होने के बाद यह व्यक्ति नौकरी कैसे कर रहा है यह सोचने वाली बात है।

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