जनसुविधा को ध्यान में रखकर तैयार करें प्रशासनिक इकाईयों में परिवर्तन के प्रस्ताव – मनोज श्रीवास्तव
ग्वालियर जनसुविधा व प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा वर्तमान संभाग, जिला, तहसील एवं विकासखंड जैसी प्रशासनिक इकाईयों के पुनर्गठन का निर्णय लिया गया है। इसके लिये शासन द्वारा “मध्यप्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग” का गठन किया है। सभी जिला कलेक्टर भौगोलिक परिस्थितियों एवं जन अपेक्षाओं के आधार पर प्रशासनिक इकाई में परिवर्तन के लिये प्रस्ताव तैयार करें। इसमें जनप्रतिनिधियों, आम जनता, अभिभाषक, स्वयंसेवी व सामाजिक कार्यकर्ता इत्यादि की राय भी ली जाए। यह बात मध्यप्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त अपर मुख्य सचिव मनोज श्रीवास्तव ने ग्वालियर – चंबल संभाग के सभी जिला कलेक्टर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कही।
मध्यप्रदेश में 68 साल में पहली बार इस तरह से प्रशासनिक इकाईयों का युक्तियुक्तिकरण करने की पहल हुई है। प्रस्ताव तैयार करते समय भौगोलिक स्थिति व क्षेत्र की ऐतिहासिकता का विशेष ध्यान रखा जाए। अनुविभाग (उपखंड) के गठन व पुनर्गठन के लिये भी सुझाव दिए जाएँ। इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखा जाए कि लोक एवं तंत्र की भौगोलिक दूरी कम करना युक्तियुक्तिकरण का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता के नियमों का पालन करते हुए प्रस्ताव को अंतिम रूप दें। परिवर्तन में ग्राम पंचायत यूनिट मानी जाए।
परिसीमन से प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग का कोई संबंध नहीं
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में यह भी स्पष्ट किया कि लोकसभा व विधानसभा क्षेत्र के लिये होने वाले परिसीमन से मध्यप्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग का कोई संबंध नहीं है। परिसीमन की प्रक्रिया पूरी तरह अलग होती है और उसे संवैधानिक प्रक्रिया के तहत भारत सरकार के नोटिफिकेशन द्वारा किया जाता है। मध्यप्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग का गठन राज्य शासन ने केवल प्रशासनिक इकाईयों के पुनर्गठन के उद्देश्य से किया है। आयोग द्वारा अपनी अनुशंसायें राज्य शासन को प्रस्तुत की जायेंगीं। जिसमें शासन निर्णय लेगा।

